#राजनीति
October 23, 2026
हिमाचल: रजनी पाटिल की दोटूक: 2-3 बार हारने वालों का कटेगा टिकट ! बयानबाजी की तो होगी कार्रवाई
पार्टी लाइन से बाहर बयानबाजी और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की चेतावनी
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल प्रदेश में 2027 के चुनावों की तैयारियों के बीच हिमाचल कांग्रेस प्रभारी और पूर्व सांसद रजनी पाटिल ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसने कई कांग्रेस नेताओं की नींद उड़ा दी है। रजनी पाटिल ने आज मंडी जिला में आयोजित संगठनात्मक बैठक में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि आने वाले चुनावों की तैयारी केवल बैठकों और नारों से नहीं होगी। इसके लिए जमीनी स्तर पर कामए अनुशासन और संगठन के प्रति जवाबदेही जरूरी होगी।
रजनी पाटिल ने स्पष्ट कह दिया है कि लगातार दो से तीन चुनाव हारने वाले नेताओं का अगले विधानसभा चुनाव में टिकट कट सकता है। उनके टिकट पर गहन मंथन होने के बाद ही अगला फैसला लिया जाएगा। उनके संदेश से संकेत मिला कि ऐसे नेताओं की उम्मीदवारी पर फैसला करते समय पिछले चुनावी परिणामों और संगठन के लिए किए गए कामकाज को ध्यान में रखा जाएगा। हालांकि, टिकट को लेकर अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर ही होगा।
यह भी पढ़ें : NIA की बड़ी कार्रवाई: हिमाचल में दबोचा 17.29 करोड़ के नकली नोट स्कैम का मास्टरमाइंड हरीश रौंटा
राजनीतिक रूप से यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी के भीतर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। लंबे समय से चुनाव लड़ रहे नेताओं और नए दावेदारों के बीच अवसरों को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। ऐसे में लगातार हार का रिकॉर्ड रखने वाले नेताओं के सामने अपने राजनीतिक प्रदर्शन और संगठनात्मक सक्रियता को साबित करने की चुनौती होगी।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी ने सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नए चेहरों को आगे लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पार्टी के लिए यह संदेश संगठन में नई ऊर्जा लाने और ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो स्थानीय स्तर पर जनता के बीच काम कर रहे हैं। हालांकि, नए चेहरों को मौका देने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पुराने नेताओं को किनारे कर दिया जाएगा। असल सवाल यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व अनुभव, चुनावी प्रदर्शन, जनसंपर्क और संगठनात्मक योगदान के बीच संतुलन कैसे बनाता है।
यह भी पढ़ें : CM सुक्खू की नीतियों से टूट रही हिमाचल कांग्रेस ! अनुराग ठाकुर का दावा... कई नेता छोड़ सकते हैं पार्टी
रजनी पाटिल ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के हाथ में टिकट देने का अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार या स्वयं प्रदेश प्रभारी की भूमिका को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उम्मीदवारों के चयन पर कांग्रेस हाईकमान का फैसला सर्वोपरि रहेगा।
उन्होंने संकेत दिया कि नेताओं के कामकाज के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। इससे साफ है कि टिकट के लिए दावेदारी करने वाले नेताओं की गतिविधियों, संगठन में उनकी भूमिका और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है।
यह भी पढ़ें : CM सुक्खू का कर्मचारियों-पेंशनरों को दिवाली तोहफा... 5 % DA का ऐलान, क्लास- 4 कर्मियों को 10 हजार भी मिलेंगे
बैठक में पार्टी अनुशासन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। रजनी पाटिल ने पार्टी लाइन से हटकर बयान देने और इंटरनेट मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां करने वालों को चेताया, जिनसे संगठन की एकजुटता प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी के भीतर रहकर संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन करना होगा और अनुशासनहीनता को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
उनके इस रुख को प्रदेश कांग्रेस के भीतर सार्वजनिक बयानबाजी और आपसी मतभेदों पर नियंत्रण रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक दलों में नेताओं की व्यक्तिगत टिप्पणियां कई बार संगठन की आधिकारिक स्थिति से अलग संदेश देती हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व की चुनौती यह रहेगी कि अनुशासन बनाए रखने के साथ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की गुंजाइश भी बनी रहे।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार ने दिवाली से पहले खुशियों से भर दी इन कर्मियों की झोली, बढा दिया मानदेय; जानें डिटेल
रजनी पाटिल ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करने की नसीहत देते हुए सख्त लहजे में कहा कि सभी को साथ चलना होगा, अन्यथा घर बैठना पड़ेगा। इस बयान को संगठन के भीतर गुटबाजी और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर सामूहिक रूप से काम करने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में पढ़ाई के नाम पर मजाक! सरकारी स्कूल की खुली पोल, कहीं एक तो कहीं दो ही कमरे
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के सामने संगठन के अलग-अलग स्तरों पर तालमेल बनाए रखने की चुनौती होगी। प्रदेश नेतृत्व के लिए जरूरी होगा कि जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां स्पष्ट हों तथा पार्टी कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़े। बैठक में दिया गया संदेश इसी जरूरत की ओर इशारा करता है।
आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा करते हुए प्रदेश प्रभारी ने कहा कि केवल कागजी दावों या किसी नारे को बार-बार दोहराने से सरकार को दोबारा सत्ता में लाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए जमीन पर उतरकर मेहनत करनी होगी और जनता के बीच संगठन की मौजूदगी मजबूत करनी होगी।
यह टिप्पणी कांग्रेस की आगामी चुनावी तैयारी के लिए अहम है। पार्टी को एक ओर सरकार के कामकाज और योजनाओं को जनता तक पहुंचाना होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समस्याओं, कार्यकर्ताओं की शिकायतों और संगठन की कमजोरियों पर भी ध्यान देना होगा। चुनावी तैयारी का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि बैठकों में तय की गई प्राथमिकताएं गांवों, कस्बों और मतदान केंद्रों तक किस तरह पहुंचती हैं।
रजनी पाटिल ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर संगठन को मजबूत करने की बात कही। क्षेत्रीय दौरों के जरिए स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद, संगठनात्मक समस्याओं की जानकारी और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जा सकती है।
मंडी की बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि जिला स्तर पर संगठन की स्थिति को समझे बिना प्रदेशव्यापी चुनावी रणनीति तैयार करना मुश्किल होगा। आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों में होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट हो सकता है कि पार्टी किस तरह बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर आगे बढ़ती है।
संगठनात्मक बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से एक नवंबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ रैली की तैयारियों की समीक्षा भी की गई। रैली के लिए कार्यकर्ताओं की भागीदारी, संगठनात्मक समन्वय और कार्यक्रम को सफल बनाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई।
इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस की गतिविधियां केवल 2027 के विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं हैं। पार्टी तत्काल राजनीतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और संगठनात्मक संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन गतिविधियों का दीर्घकालीन चुनावी तैयारी में कितना योगदान होगा, यह संगठन के अमल और जनसंपर्क पर निर्भर करेगा।