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November 2, 2026
हिमाचल: रोहतांग समेत ऊंची चोटियों पर बर्फबारी, ओलावृष्टि से बढ़ी मुश्किलें; जानें दिवाली तक का मौसम
लाहौल स्पीति में बढ़ी ठिठुरन, मैदानी इलाकों में घने कोहरे का आगाज
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शिमला/मनाली। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के जनजातीय और ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड ने अचानक दस्तक तेज कर दी है। रोहतांग दर्रे सहित लाहौल-स्पीति और किन्नौर की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी हुई है, जिसके बाद पहाड़ों ने सफेद चादर ओढ़ ली। बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और सुबह-शाम कड़ाके की ठंड का एहसास बढ़ गया है।
रविवार रात से शुरू हुए मौसम के बदलाव का असर सोमवार सुबह तक देखने को मिला। रोहतांग दर्रे पर हल्की बर्फबारी के बाद पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद परत से ढक गया। वहीं, लाहौल घाटी के कई हिस्सों में बादल छाए रहे और ठंडी हवाओं ने मौसम को और सर्द बना दिया।
समुद्र तल से करीब 13,050 फीट की ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रे में ताजा बर्फबारी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन गई। बर्फबारी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में सैलानी रोहतांग की ओर पहुंचे और बर्फ से ढकी वादियों का आनंद लिया। पर्यटकों ने बर्फबारी के बीच प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाया और इस मौसम परिवर्तन को कैमरों में कैद किया।
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अटल टनल, सिस्सू और लाहौल घाटी के अन्य क्षेत्रों में सोमवार को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। हालांकि, रोहतांग दर्रे और कुंजम पास की दिशा में यातायात सुचारु रहा। प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर अब आगे के मौसम पर बनी हुई है, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक होने वाली बर्फबारी से सड़क व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ताजा बर्फबारी के बाद लाहौल-स्पीति के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट महसूस की गई है। प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल कुकुमसेरी में रात का न्यूनतम तापमान माइनस 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां सर्दियों की आहट अब साफ तौर पर महसूस होने लगी है।
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अन्य क्षेत्रों में भी रात का तापमान काफी नीचे पहुंच गया। ताबो में न्यूनतम तापमान 0.1 डिग्री, कल्पा में 4.2 डिग्री, मनाली में 7.1 डिग्री, कुफरी में 8.0 डिग्री, सोलन में 10.3 डिग्री तथा शिमला और बिलासपुर में करीब 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और ठंडी हवाओं के कारण सुबह और शाम लोगों को ज्यादा ठंड महसूस हो रही है। स्थानीय लोगों ने गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना को देखते हुए सर्दियों की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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मौसम के अचानक बदले मिजाज के साथ कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। कोकसर, ग्रांफू, छतड़ू और कोटखाई सहित कुछ इलाकों में ओले गिरने से स्थानीय लोगों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। ओलावृष्टि से बागवानी और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से ऊंचाई और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की इस तरह की गतिविधियां बागवानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। अचानक हुई ओलावृष्टि ने कई स्थानों पर मौसम को और खराब कर दिया। स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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लाहौल-स्पीति के साथ-साथ किन्नौर की ऊंची चोटियों पर भी बर्फ के फाहे गिरने से पर्वतीय क्षेत्रों का नजारा बदल गया है। बर्फबारी के बाद ऊंची चोटियां सफेद दिखाई देने लगी हैं। इसका सीधा असर आसपास के इलाकों के तापमान पर भी पड़ा है। हालांकि, राजधानी शिमला सहित प्रदेश के कई मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सोमवार को मौसम साफ रहा और दिन में धूप खिली रही। दिन के समय धूप निकलने से लोगों को राहत मिली, लेकिन सुबह और शाम ठंड लगातार बढ़ती जा रही है।
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प्रदेश के मैदानी और घाटी वाले क्षेत्रों में अब सुबह के समय कोहरा भी दस्तक देने लगा है। मंडी जिले के सुंदरनगर में घना कोहरा छाने से दृश्यता काफी कम हो गई। कई स्थानों पर दृश्यता करीब 200 मीटर तक सिमटने की बात सामने आई है, जिससे वाहन चालकों को सावधानी के साथ यात्रा करने की सलाह दी गई है। बिलासपुर में गोबिंद सागर झील के आसपास भी सुबह के समय धुंध का असर देखने को मिल रहा है। झील के करीब 20 किलोमीटर के दायरे में सुबह सात बजे से दस बजे तक धुंध छाने से दृश्यता प्रभावित हो रही है। ऐसे में सुबह के समय वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में आने वाले दिनों में मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क रहने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के कारण व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी के आसार कम हैं। दिवाली तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं जताई जा रही है। हालांकि, साफ मौसम के बावजूद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है। सुबह और शाम की ठंड लगातार बढ़ेगी, जबकि दिन के समय धूप खिलने से मौसम सुहावना बना रह सकता है।
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मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर महीने में हिमाचल प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। राज्य में सामान्य 25.1 मिलीमीटर वर्षा के मुकाबले करीब 28.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जो औसत से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 1901 के बाद अक्तूबर महीने में दर्ज हुई बारिश के आंकड़ों में यह उल्लेखनीय स्तर पर रही। जिलावार आंकड़ों के अनुसार कांगड़ा जिले में सामान्य से सबसे अधिक, करीब 115 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। वहीं, सिरमौर और किन्नौर के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रही।
कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश में मौसम के इस बदलाव ने सर्दियों के आगमन का स्पष्ट संकेत दे दिया है। रोहतांग दर्रे सहित ऊंची चोटियों पर हुई बर्फबारी ने जहां पर्यटन को नई रौनक दी है, वहीं लाहौल-स्पीति में तापमान गिरने से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। दूसरी ओर, ओलावृष्टि ने किसानों और बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आसमान साफ रहने की संभावना है, लेकिन ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में सुबह और रात के समय ठंड लगातार बढ़ती जाएगी। ऐसे में हिमाचल अब धीरे-धीरे सर्दियों के रंग में रंगता नजर आने लगा है।