मंडी। डॉक्टर- मरीज के बीच के संवेदनशील रिश्ते को दर्शाती एक घटना हिमाचल प्रदेश से सामने आई है, जहां डॉक्टर ने अपनी बीमारी की परवाह किए बिना मरीज के जीवन के को सलामत रखने के लिए विशेष परिस्थिति में भी उपचार किया। बता दें कि जिला मंडी के जोनल अस्पताल से समाचार प्राप्त हुआ है कि वहां पर कार्यरत डॉक्टर ने मरीज का इलाज किया, हालांकि डॉ. दुष्यंत ठाकुर का खुद उसी दिन पैर का ऑपरेशन हुआ था।

मरीज की हालत गंभीर

हुआ यूं कि करीब 12 बजे ऑपरेशन के बाद डॉ. दुष्यंत को धर्मपुर निवासी 64 वर्षीय नारायण सिंह के परिजनों का फोन आया, जिसमें बताया गया कि नारायण सिंह की हालत गंभीर है और वह केवल डॉ. दुष्यंत से उपचार करवाने की जिद कर रहे हैं। यह भी पढ़ें : हिमाचल में नौकरी पाने का सुनहरा मौका, कल यहां होगा कैंपस इंटरव्यू हालांकि, नारायण सिंह का उपचार मेडिकल कॉलेज नेरचौक में चल रहा था, लेकिन वह वहां के उपचार से संतुष्ट नहीं थे और जबरन छुट्टी लेकर जोनल अस्पताल मंडी पहुंचे थे।

डॉक्टर ने निभाया फर्ज

डॉ. दुष्यंत ने मरीज की जिद को नकार नहीं पाया और उसे अपने पास लाने को कहा। बिस्तर पर होते हुए भी उन्होंने नारायण सिंह को देखा और उसे जोनल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। उन्होंने कहा कि बतौर डॉक्टर, मेरा पहला कर्तव्य है कि मैं मरीज को उपचार दूं। यह भी पढ़ें : हिमाचल के प्रत्यूष ने पहले ही अटेंप्ट में क्वालीफाई किया JRF, हासिल किए इतने अंक

मरीज की स्थिति में सुधार

नारायण सिंह फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं और डॉ. दुष्यंत के इलाज से पहले भी उनके परिवार के कई सदस्यों का इलाज किया गया है। नारायण सिंह ने बताया कि अब उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और वे पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं। उनके दामाद सोहन सिंह ने भी डॉ. दुष्यंत का आभार व्यक्त किया। वहीं उनका कहना था कि ऐसे डॉक्टर बिरले ही मिलते हैं जो मरीज के प्रति इतनी संवेदनाएं रखते हैं।

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