मंडी। हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों में इस बार कई रोचक और हैरान कर देने वाले मुकाबले देखने को मिले] लेकिन मंडी जिला से सामने आई एक चुनावी कहानी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां सियासत की जंग सीधे एक ही परिवार के आंगन तक पहुंच गई, जहां दो सगे जुड़वा भाइयों की पत्नियां चुनावी मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ उतर गईं। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि चुनाव परिणाम भी इतने रोमांचक रहे कि जीत-हार का फैसला मतों से नहीं] बल्कि भाग्य के भरोसे करना पड़ा।
जब परिवार की जंग पहुंची चुनावी मैदान में
धर्मपुर उपमंडल की बैरी पंचायत के वार्ड नंबर चार (निचली बैरी) में वार्ड सदस्य पद के लिए मुकाबला बेहद खास बन गया था। यहां एक ही परिवार की दो महिलाओं ने चुनाव लड़ने का फैसला किया। दोनों प्रत्याशी रिश्ते में जेठानी और देवरानी थीं, जबकि उनके पति सगे जुड़वा भाई हैं। एक ओर अनीता देवी मैदान में थीं तो दूसरी ओर नीलम देवी ने चुनावी चुनौती पेश की। जैसे ही दोनों के नामांकन सामने आए, पूरे क्षेत्र में इस मुकाबले की चर्चा शुरू हो गई। ग्रामीण भी उत्सुक थे कि आखिर परिवार के इस चुनावी मुकाबले में जनता किसका साथ देगी।
यह भी पढ़ें : निगम के बाद अब बीडीसी-जिला परिषद के सामने आ रहे चौंकाने वाले नतीजे; जानें कौन कहां से जीता
चुनाव प्रचार में भी कायम रहा पारिवारिक सौहार्द
आमतौर पर चुनावी मुकाबलों में आरोप-प्रत्यारोप और तनाव देखने को मिलता है, लेकिन इस चुनाव में तस्वीर बिल्कुल अलग थी। दोनों परिवारों ने चुनाव प्रचार तो पूरे उत्साह के साथ किया, लेकिन रिश्तों में किसी तरह की कड़वाहट नहीं आने दी। ग्रामीणों के अनुसार चुनावी प्रतिस्पर्धा अपनी जगह थी, जबकि पारिवारिक रिश्ते अपनी जगह कायम रहे। यही कारण था कि यह मुकाबला पूरे क्षेत्र में लोकतंत्र और पारिवारिक सौहार्द की मिसाल बन गया।
जनता ने दोनों को दिया बराबर प्यार
मतदान के बाद जब मतगणना शुरू हुई तो परिणाम ने सभी को चौंका दिया। मतदाताओं ने दोनों उम्मीदवारों पर समान भरोसा जताया और दोनों को बराबर-बराबर वोट मिले। अनीता देवी को 51 मत प्राप्त हुए, जबकि नीलम देवी के खाते में भी 51 वोट आए। परिणाम सुनते ही मतगणना केंद्र में मौजूद लोग हैरान रह गए। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि मुकाबला इतनी बराबरी पर जाकर रुकेगा।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : मानसून में हुए बेघर, बच्चों-बुजुर्गों संग तबुओं में रह रहे 21 परिवार; एक साल बाद भी नहीं मिला ठिकाना
भाग्य ने तय की जीत
जब दोनों उम्मीदवारों को समान मत मिले तो चुनाव नियमों के अनुसार विजेता तय करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई। दोनों प्रत्याशियों और अधिकारियों की मौजूदगी में पर्ची डालकर फैसला करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद सभी की नजरें उस पर्ची पर टिक गईं, जो किसी एक उम्मीदवार को विजेता बनाने वाली थी। आखिरकार जब पर्ची निकाली गई तो उसमें नीलम देवी का नाम सामने आया और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया। इस तरह चुनावी मैदान में जीत और हार का फैसला मतों से नहीं बल्कि किस्मत के एक फैसले से हुआ।
यह भी पढ़ें- हिमाचल की इस पंचायत में हुआ हाई-वोल्टेज चुनाव- पूर्व ZP ने बचाई अपनी साख, बेटी 330 के अंतर से विजयी
पूरे जिले में चर्चा का विषय बना चुनाव
मंडी जिले में यह अनोखा चुनावी मुकाबला अब लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। लोकतंत्र में बराबरी के वोट मिलना अपने आप में दुर्लभ माना जाता है, लेकिन एक ही परिवार की दो महिलाओं के बीच हुए मुकाबले में ऐसा होना और फिर पर्ची से विजेता तय होना इस चुनाव को और भी खास बना गया। ग्रामीणों का कहना है कि जनता ने किसी को निराश नहीं किया और दोनों उम्मीदवारों को बराबर समर्थन दिया। अंत में फैसला भाग्य के हाथों में चला गया, जहां किस्मत ने नीलम देवी का साथ दिया।
