शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने एक मास्टरप्लान तैयार किया है। प्रदेश के खाली खजाने को भरने के लिए सरकार ने शराब को एक बड़े हथियार के रूप में चुना है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसका बोझ आम जनता की जेब पर नहीं पड़ेगा।

 

सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए आबकारी और अन्य करों से ₹2900 करोड़ जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, वह भी शराब के दाम बढ़ाए बिना। सरकार का मानना है कि बेहतर प्रबंधनए पारदर्शी नीलामी और पर्यटकों से होने वाली बिक्री के जरिए राजस्व में बढ़ोतरी संभव है। सुक्खू सरकार के इस फैसले से शराब के शौकीनों ने राहत की सांस ली है।

 

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पुरानी कीमतों में नया नशा

आमतौर पर राजस्व बढ़ाने का मतलब कीमतों में बढ़ोतरी माना जाता हैए लेकिन सुक्खू सरकार ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए साफ संकेत दिए हैं कि शराब की कीमतों में कोई भारी वृद्धि नहीं की जाएगी। सरकार का फोकस कीमतों को बढ़ाने के बजाय व्यवस्था को दुरुस्त करने और लीकेज रोकने पर है। इसका सीधा फायदा प्रदेश के उन उपभोक्ताओं और पर्यटकों को मिलेगा जो भारी कीमतों के डर से सहमे हुए थे।

क्या कहते हैं एक्साइज कमिश्नर

स्टेट टैक्स एंड एक्साइज कमिश्नर डॉ युनूस का कहना है कि इस बार शराब के ठेकों की नीलामी सहित अन्य आबकारी से 2900 करोड़ के राजस्व प्राप्त का लक्ष्य तय किया है। उनका कहना है कि पिछली बार की तुलना में राजस्व प्राप्ति का ये अधिक टारगेट निर्धारित किया गया है। जिससे सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

 

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पर्यटन से भी बढ़ेगी शराब की बिक्री

हिमाचल की वादियों का लुत्फ उठाने आने वाले पर्यटकों के लिए अब नियम सख्त हो गए हैं। अक्सर देखा गया है कि पड़ोसी राज्यों (जैसे चंडीगढ़ या हरियाणा) में शराब सस्ती होने के कारण पर्यटक वहीं से स्टॉक लेकर हिमाचल आते हैं। इससे प्रदेश के राजस्व को भारी चपत लगती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक नया नियम लागू किया है। अब बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक अपने साथ खरीदी हुई शराब हिमाचल में नहीं ला सकेंगे। यदि कोई व्यक्ति शराब अपने पास रखना चाहता है, तो उसे हिमाचल में ही खरीदी गई बोतलें साथ रखनी होंगी, जिन पर स्पष्ट रूप से “For Sale in Himachal Pradesh Only” लिखा होगा।

 

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राजस्व का ग्राफ: लगातार बढ़ रही है कमाई

हिमाचल में सत्ता परिवर्तन के बाद जब से शराब के ठेकों की नीलामी शुरू हुई है, खजाने में आने वाले पैसे का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। नीचे दी गई तालिका सरकार की वित्तीय प्रगति को दर्शाती है:

 

शराब रखने की सीमा भी तय

सरकार ने नियमों को संतुलित रखने के लिए शराब रखने की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की है। नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक समय में अधिकतम छह बोतल शराब अपने पास रख सकता है, लेकिन यह शराब हिमाचल में ही खरीदी गई होनी चाहिए। इस व्यवस्था से न केवल राजस्व बढ़ेगा बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

 

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पर्यटन और राजस्व का कनेक्शन

हिमाचल में हर साल करोड़ों की संख्या में सैलानी आते हैं। साल 2015 के आंकड़ों को देखें तो करीब 1.75 करोड़ देशी-विदेशी पर्यटक देवभूमि पहुंचे थे। सरकार जानती है कि यदि इन पर्यटकों की शराब की खपत को स्थानीय बाजार से जोड़ दिया जाए, तो राजस्व का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकता है। अवैध शराब और बाहरी तस्करी पर लगाम कसने के लिए विभाग ने अपनी कमर कस ली है।

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