#विविध
April 27, 2026
सुक्खू सरकार ला रही नया कानून : अब नहीं होंगे घोटाले, चेस्टर हिल मामले के बाद लिया फैसला
हिमाचल में अब बेनामी निवेश पर लगेगी लगाम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रदेश में पंजाब की तर्ज पर अपार्टमेंट एक्ट को दोबारा नए स्वरूप में लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
इसका सीधा उद्देश्य रियल एस्टेट में हो रहे बेनामी निवेश पर लगाम लगाना और घर खरीदने वाले लोगों के हितों को मजबूत सुरक्षा देना है। सरकार का मानना है कि एक्ट लागू होने से लोगों का रियल एस्टेट सेक्टर में भी विश्वास बढ़ेगा।
पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल में रियल एस्टेट गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। खासकर पर्यटन क्षेत्रों और शहरों के आसपास बहुमंजिला इमारतों और फ्लैट प्रोजेक्ट्स का विस्तार हुआ है। मगर इसके साथ ही निवेश के स्रोत और लेन-देन की पारदर्शिता को लेकर सवाल भी खड़े हुए हैं।
मौजूदा व्यवस्था में कई ऐसी खामियां सामने आई है- जिनके चलते बाहरी निवेशक स्थानीय लोगों के नाम का इस्तेमाल कर निवेश कर रहे हैं। इससे नियमों को दरकिनार करने की आशंका बनी रहती है।
प्रदेश में पहले रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) लागू होने के बाद अपार्टमेंट एक्ट को समाप्त कर दिया गया था। मगर अब हाल ही में सामने आए कुछ विवादित प्रोजेक्ट्स, खासकर चेस्टर हिल परियोजना से जुड़े मामलों ने सरकार को इस दिशा में फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि केवल रेरा पर्याप्त नहीं है। एक अलग और मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है- जो अपार्टमेंट और फ्लैट आधारित परियोजनाओं को सीधे नियंत्रित कर सके।
प्रस्तावित नए अपार्टमेंट एक्ट के तहत प्रमोटरों और बिल्डरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि किसी भी परियोजना में लगने वाला पैसा चाहे वह स्थानीय हो या बाहरी पूरी तरह रिकॉर्ड में आएगा। इससे निवेश के स्रोत की जांच आसान होगी और बेनामी लेन-देन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
अपार्टमेंट एक्ट मूल रूप से एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जो-
इसके अलावा, नई व्यवस्था में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बाहरी निवेशक तभी किसी प्रोजेक्ट में धन लगा सकें, जब वे इस एक्ट के तहत पंजीकृत हों। इससे न केवल निवेश की निगरानी मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के हितों की भी रक्षा होगी, क्योंकि उनके नाम पर होने वाले किसी भी निवेश को अब छिपाना आसान नहीं रहेगा।
हिमाचल में अपार्टमेंट एक्ट को दोबारा लागू करने की आवश्यकता इसलिए भी महसूस की जा रही है- क्योंकि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां नियमों की कमी का फायदा उठाकर जमीन और प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े हुए हैं।
सरकार का मानना है कि अगर अपार्टमेंट एक्ट को सख्ती और स्पष्ट प्रावधानों के साथ लागू किया जाता है- तो रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास बढ़ेगा। इससे न केवल निवेशकों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि आम लोगों के लिए घर खरीदना भी ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद प्रक्रिया बन सकेगी।