शिमला। हिमाचल प्रदेश में पूर्व जयराम सरकार के समय शुरू की गई हिमकेयर योजना को लेकर सुक्खू सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में हिमकेयर के तहत मरीजों के इलाज के भुगतान की व्यवस्था अब पहले जैसी नहीं रहेगी। प्रदेश सरकार ने इलाज की प्रतिपूर्ति को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सरकारी संस्थानों को हिमकेयर के तहत इलाज पर वास्तविक खर्च या निर्धारित पैकेज रेट में से जो राशि कम होगी, उतनी ही राशि का दावा करने की अनुमति होगी।

 

चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हिमकेयर योजना समय-समय पर भुगतान, बिलों और कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रही है। हालांकि नई अधिसूचना का मुख्य फोकस सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को स्पष्ट करना है।

सुक्खू सरकार ने बदल दिया इलाज के भुगतान का गणित

नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज हिमकेयर के मरीज का इलाज करने के बाद इलाज पर हुए वास्तविक खर्च और योजना के तहत निर्धारित पैकेज रेट के आधार पर भुगतान का दावा कर सकेंगे। लेकिन दोनों में से जो राशि कम होगी, वही प्रतिपूर्ति के लिए मान्य होगी। यानी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि पैकेज की तय सीमा से अधिक खर्च होने की स्थिति में भी सरकारी संस्थान पैकेज रेट से ज्यादा राशि हिमकेयर के तहत क्लेम नहीं कर पाएंगे।

 

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50 हजार का पैकेज, खर्च 40 हजार तो मिलेगा 40 हजार

सरकार के नए नियम को एक उदाहरण से समझें। यदि किसी उपचार के लिए हिमकेयर के तहत पैकेज रेट 50 हजार रुपये निर्धारित है और सरकारी अस्पताल में उस इलाज पर वास्तविक खर्च 40 हजार रुपये आता है, तो अस्पताल 40 हजार रुपये का ही दावा कर सकेगा। वहीं, यदि उसी उपचार में अस्पताल का वास्तविक खर्च बढ़कर 60 हजार रुपये हो जाता है, तब भी हिमकेयर के तहत अधिकतम 50 हजार रुपये यानी निर्धारित पैकेज रेट तक ही दावा किया जा सकेगा। इस तरह अब सरकारी संस्थानों के लिए भुगतान की अधिकतम सीमा पैकेज रेट और वास्तविक खर्च में से कम राशि होगी।

 

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मरीजों को मिलता रहेगा कैशलेस इलाज

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए नियम के बावजूद हिमकेयर के तहत सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में मरीजों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती रहेगी। अस्पताल इलाज से संबंधित वास्तविक खर्च के आधार पर दावा कर सकेंगे। इसके साथ ही अधिसूचना में हिमकेयर साथी के निर्धारित पारिश्रमिक का क्लेम करने की भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है।

 

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इसका मतलब यह है कि योजना के तहत इलाज करवाने वाले मरीज को अस्पताल में उपचार के दौरान सीधे भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी, जबकि भुगतान की प्रक्रिया सरकार और संबंधित संस्थान के बीच योजना के नियमों के अनुसार होगी।

सरकारी स्टोर से मिली दवाओं का दोबारा नहीं मिलेगा पैसा

नई अधिसूचना में सरकार ने दवाइयों और मेडिकल सामग्री को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है। इलाज के दौरान ऐसी दवाइयां, कंज्यूमेबल, सर्जिकल सामान और अन्य सामग्री, जो पहले से सरकारी सप्लाई में उपलब्ध हैं या राज्य सरकार अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट से अलग से उपलब्ध करवाई गई हैं, उनका भुगतान हिमकेयर योजना के तहत दोबारा क्लेम नहीं किया जा सकेगा। यानी सरकारी संसाधनों से उपलब्ध करवाई जा चुकी सामग्री को हिमकेयर के बिल में अलग से जोड़कर भुगतान लेने की व्यवस्था नहीं होगी।

 

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8 अप्रैल के पुराने आदेश की जगह लागू हुआ नया फैसला

सरकार का यह नया आदेश चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से 8 अप्रैल 2026 को जारी की गई पिछली अधिसूचना को सुपरसीड करता है। यानी अब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हिमकेयर के तहत भुगतान के लिए नई व्यवस्था प्रभावी होगी। यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी की गई है।

कई विभागों और अधिकारियों को भेजी गई अधिसूचना

नई व्यवस्था को लागू करवाने के लिए सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आदेश की प्रतियां भेज दी हैं। इनमें महालेखाकार, हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सर्विसेज निदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक समेत अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं। 
इससे साफ है कि सरकार ने हिमकेयर के तहत सरकारी संस्थानों में होने वाले इलाज और उसके भुगतान की प्रक्रिया को एक समान तरीके से लागू करने की तैयारी कर ली है।

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सुक्खू सरकार ने बदली भुगतान व्यवस्था

हिमकेयर योजना की शुरुआत हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसका उद्देश्य प्रदेश के पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद सुक्खू सरकार ने योजना की भुगतान व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार के नए आदेश का सीधा असर उन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ेगा, जो हिमकेयर के तहत मरीजों का उपचार कर प्रतिपूर्ति के लिए बिल प्रस्तुत करते हैं।

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