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August 26, 2026
हिमाचल के गांव में फिर फैली ये बीमारी- 1100 से ज्यादा चपेट में, म.रने वालों का आंकड़ा पहुंचा 23
एक दिन में 1,470 पशुओं को लगी वैक्सीन
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में लंपी स्किन डिजीज का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को बीमारी के 8 नए मामले सामने आए। इसके बाद जिले में संक्रमित पशुओं की संख्या बढ़कर 48 हो गई है। इसी दिन लंपी से पीड़ित दो पशुओं की मौत भी हो गई। इनमें एक पशु नादौन और दूसरा बड़सर क्षेत्र का बताया जा रहा है।
दो और पशुओं की मौत के बाद हमीरपुर जिले में लंपी स्किन डिजीज से मरने वाले पशुओं की संख्या 4 हो गई है। इनमें 3 पशु बड़सर और 1 नादौन क्षेत्र का है। बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग ने निगरानी और इलाज का काम तेज कर दिया है।
बीमारी से बचाव के लिए बुधवार को पशुपालन विभाग ने करीब 1,470 पशुओं का टीकाकरण किया। विभाग के मुताबिक अब तक करीब 3,000 पशुओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। विभाग के पास अभी लगभग 13,500 टीके उपलब्ध हैं।
प्रभावित इलाकों के साथ-साथ जिले के दूसरे हिस्सों में भी पशुओं पर नजर रखी जा रही है। कोशिश है कि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखें तो समय रहते उसका इलाज शुरू किया जा सके।
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से सावधानी बरतने की अपील की है। अगर किसी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग कर दें। इसके बाद नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशु को अलग रखने से बीमारी को दूसरे पशुओं में फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।
लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह वायरस से होती है और मच्छर, काटने वाली मक्खियां और टिक जैसे कीट इसके फैलने की वजह बन सकते हैं। बीमारी होने पर पशु को बुखार आ सकता है और शरीर की त्वचा पर गोल-गोल उभरी हुई गांठें दिखाई दे सकती हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
पशुपालन विभाग हमीरपुर के सहायक निदेशक परियोजना डॉ. सतीश ने बताया कि पशुओं का टीकाकरण लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि जिले में अब तक लंपी स्किन डिजीज से 4 पशुओं की मौत हो चुकी है। विभाग की ओर से बीमारी को रोकने के लिए लगातार निगरानी और टीकाकरण किया जा रहा है।
सिरमौर में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां इनकी संख्या करीब आधी थी, फिर यह बढ़कर 1039 हो गई है और अब 1087 हो गई है। इनमें से 513 पशु इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, जबकि 507 पशुओं का अभी इलाज चल रहा है।
इस दौरान 19 पशुओं की मौत भी हुई है। शुरुआत में पांवटा साहिब, माजरा, धौलाकुआं और कालाअंब इलाके में ऐसे मामले सामने आए थे। अब धारटीधार के कुछ गांवों में भी लंपी जैसे लक्षण वाले पशु मिले हैं।