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August 27, 2026
जयराम ने लॉटरी को बताया चिट्टे से भी खतरनाक, मंत्री बोले- प्रदेश को होगी करोड़ों की कमाई
1999 में बंद हुई थी हिमाचल में सरकारी लॉटरी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लॉटरी शुरू होने से पहले ही इसे लेकर सियासत गरमा गई है। सरकार जहां इसे अतिरिक्त राजस्व जुटाने का जरिया बता रही है। वहीं, विपक्ष इसके सामाजिक असर पर सवाल खड़े कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार से लॉटरी का फैसला वापस लेने की मांग करते हुए इसे चिट्टे के नशे से भी ज्यादा खतरनाक बताया है।
जयराम ठाकुर का कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रदेश के लिए लॉटरी कोई स्थायी समाधान नहीं है। दूसरी ओर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि प्रदेश में सिंगल लाइन या सिंगल डिजिट वाली लॉटरी नहीं होगी और पूरी व्यवस्था तय नियमों के तरह संचालित की जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने लॉटरी के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इसकी लत लगने के बाद लोगों को अपने आर्थिक नुकसान का अंदाजा तक नहीं रहता। उनका दावा है कि कई लोग लॉटरी के चक्कर में अपनी जमा पूंजी, घर और जेवर तक गंवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल का युवा पहले ही नशे की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे समय में लॉटरी शुरू करना लोगों के सामने आर्थिक बर्बादी का एक और रास्ता खोलने जैसा होगा। जयराम ने सरकार से सवाल किया कि लॉटरी से होने वाली आमदनी आखिर कितने लोगों के काम आएगी। जबकि इसकी वजह से बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक नुकसान की चपेट में आ सकते हैं।
जयराम ठाकुर ने लॉटरी के संचालन या लाइसेंस से जुड़े लोगों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों या एजेंसियों को लॉटरी संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, उनकी भूमिका और प्रक्रिया आने वाले समय में जांच का विषय बन सकती है। उन्होंने सरकार से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने और फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की।
विपक्ष के आरोपों पर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हिमाचल में रोजाना खुलने वाली सिंगल लाइन या सिंगल डिजिट लॉटरी शुरू नहीं की जाएगी।
सरकार ने लॉटरी के संचालन के लिए नियम और मानक तैयार किए हैं। राज्य में पेपर और ऑनलाइन दोनों तरह की लॉटरी का प्रावधान किया गया है। आधिकारिक नियमों के मुताबिक लॉटरी व्यवस्था सरकार की निगरानी में रहेगी और इसके संचालन के लिए एजेंट की नियुक्ति टेंडर प्रक्रिया से की जाएगी।
हर्षवर्धन चौहान के मुताबिक लॉटरी से सरकार को शुरुआती दौर में करीब 10 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह आय बढ़कर करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
सरकार का तर्क है कि हिमाचल में लंबे समय से लॉटरी बंद होने के बावजूद प्रदेश के लोग दूसरे राज्यों की लॉटरी में पैसा लगाते हैं। ऐसे में सरकार नियंत्रित और नियमबद्ध व्यवस्था के जरिए राजस्व जुटाना चाहती है।
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में ऑनलाइन और पेपर दोनों तरह की लॉटरी शामिल है। अधिसूचित नियमों के अनुसार टिकट की न्यूनतम कीमत 2 रुपये रखी गई है और अलग-अलग योजनाओं के तहत ड्रॉ की व्यवस्था की गई है।
लॉटरी संचालन में सुरक्षा और निगरानी के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, बारकोड और QR कोड जैसी व्यवस्थाएं भी निर्धारित की गई हैं। हाल ही में वित्त विभाग के कोष, लेखा एवं लॉटरी निदेशालय ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए सोल सेलिंग एजेंट नियुक्त करने को ई-टेंडर भी जारी किया है।
लॉटरी को लेकर भाजपा की ओर से सिर्फ जयराम ठाकुर ही विरोध नहीं जता रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर लॉटरी के लिए जारी टेंडर वापस लेने की मांग की है। अनुराग ने तर्क दिया है कि हिमाचल में लंबे समय से लॉटरी पर राजनीतिक सहमति से प्रतिबंध रहा है और इसे दोबारा शुरू करने से सामाजिक तथा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
हिमाचल में सरकारी लॉटरी पर 1999 में तत्कालीन प्रेम कुमार धूमल सरकार के समय रोक लगाई गई थी। बाद में 2007 में लॉटरी दोबारा शुरू करने की कोशिश हुई, लेकिन तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार ने भी इस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद प्रदेश में अपनी लॉटरी व्यवस्था लंबे समय तक बंद रही।
अब करीब ढाई दशक बाद सरकार इसे दोबारा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का दावा है कि इससे राजस्व बढ़ेगा, जबकि विपक्ष इसे सामाजिक तौर पर नुकसानदायक कदम बता रहा है। ऐसे में लॉटरी शुरू होने से पहले ही हिमाचल की सियासत में इसका मुद्दा गरमा गया है।