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August 27, 2026
हिमाचल में स्वाइन फ्लू की एंट्री- 2 मासूमों समेत 4 मरीज मिले; स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत लें मेडिकल मदद
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में फ्लू का संक्रमण अब चिंता बढ़ाने लगा है। कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के चार मरीज सामने आए हैं। खास बात यह है कि संक्रमण की पुष्टि एक सात माह और एक साल के दो बच्चों के साथ 72 और 85 वर्ष की उम्र के दो बुजुर्गों में हुई है।
दिल्ली समेत आसपास के क्षेत्रों में मामलों के बीच हिमाचल में चार मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क कर दिया गया है। टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने बताया कि अस्पताल में बुधवार को आठ सैंपलों की जांच की गई थी।
इनमें चार नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन फ्लू जैसे लक्षण होने पर सावधानी बरतना जरूरी है।
जांच में जिन चार मरीजों में संक्रमण पाया गया है, उनमें कांगड़ा के सात महीने और एक वर्ष के दो बच्चे शामिल हैं। इनके अलावा चंबा जिले के 72 और 85 वर्षीय दो बुजुर्गों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।
छोटे बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण की पुष्टि होने के कारण खास सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक उम्रदराज लोगों और छोटे बच्चों में संक्रमण होने पर उनकी स्थिति पर करीबी नजर रखना जरूरी होता है।
हिमाचल में स्वाइन फ्लू को लेकर इससे पहले शिमला स्थित IGMC में भी एक संदिग्ध मरीज सामने आया था। हालांकि, जांच के बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अब टांडा मेडिकल कॉलेज में चार मामलों की पुष्टि हुई है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं है। लोगों को केवल सतर्क रहने और बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी गई है।
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है और इसे H1N1 के नाम से भी जाना जाता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से यह फैल सकता है।
इसमें सामान्य तौर पर तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान, नाक बहना या बंद होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हर संक्रमित व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में मतली और उल्टी की समस्या भी हो सकती है।
टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लोगों को फ्लू जैसे लक्षण होने पर लापरवाही न बरतने की सलाह दी है। सर्दी-जुकाम, बुखार या गले में खराश होने पर मास्क पहनना और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाना संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद कर सकता है।
अगर लक्षण बने रहते हैं या तबीयत बिगड़ने लगे तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों में फ्लू जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
अगर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी या तेजी से बिगड़ती तबीयत जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गंभीर संक्रमण वाले मरीजों में डॉक्टर स्थिति के अनुसार उपचार और एंटीवायरल दवा देने का निर्णय लेते हैं।
फिलहाल टांडा में चार मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद अस्पताल प्रशासन सतर्क है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी लोगों को डरने के बजाय सावधानी बरतने और संक्रमण के संभावित लक्षण सामने आने पर समय रहते जांच करवाने की सलाह दी जा रही है।