शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अध्ययन अवकाश यानी स्टडी लीव के दौरान पूर्ण वेतन देने का प्रावधान लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो उच्च शिक्षा, शोध कार्य या पेशेवर प्रशिक्षण के लिए अध्ययन अवकाश लेते हैं।
कर्मी बिना आर्थिक दबाव अपने कौशल विकास पर दे सकेंगे ध्यान
दरअसल, अब तक प्रदेश में स्टडी लीव पर जाने वाले कर्मचारियों को केवल 40 प्रतिशत वेतन के साथ महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता दिया जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को अध्ययन अवधि के दौरान 100 प्रतिशत वेतन मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारी बिना आर्थिक दबाव के अपनी शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान दे सकेंगे।
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सबसे अहम बात यह है कि यह लाभ केवल भविष्य में स्टडी लीव लेने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। जिन कर्मचारियों ने पहले अध्ययन अवकाश लिया था और उन्हें पुराने नियमों के तहत कम वेतन मिला था, उन्हें भी अंतर की राशि (एरियर) प्रदान की जाएगी। इससे हजारों कर्मचारियों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
1972 के नियम-56 में किया संशोधन
राज्य सरकार ने इस संबंध में सीसीएस रूल, 1972 के नियम-56 में संशोधन किया है। यह कदम वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा को अमल में लाने की दिशा में उठाया गया है। सरकार का कहना है कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था में कर्मचारियों का लगातार प्रशिक्षण और ज्ञानवर्धन बेहद जरूरी है।
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के कल्याण और उनके पेशेवर विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि जब कर्मचारी नई तकनीकों, आधुनिक प्रबंधन और उच्च शिक्षा से जुड़ेंगे तो सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ेंगे
सरकार के इस फैसले को कर्मचारी वर्ग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इससे शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ेंगे, साथ ही सरकारी विभागों में दक्षता और कार्यकुशलता भी मजबूत होगी।
