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July 24, 2026
सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला: सभी बोर्ड निगमों के खजाने की निगरानी को बनेगी नई फाइनेंस कंपनी
प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी बोर्डों और निगमों की वित्तीय देखरेख के लिए एक नई फाइनेंस कंपनी बनाने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के जरिए सार्वजनिक उपक्रमों के बजट, खर्च, नकदी प्रबंधन और वित्तीय गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाएगी।
राज्य मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब वित्त विभाग कंपनी के गठन और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करेगा। सरकार का मानना है कि एक केंद्रीकृत वित्तीय व्यवस्था बनने से सरकारी उपक्रमों के आर्थिक प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय योजना बनाना आसान होगा।
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सरकार इस नई संस्था का नाम हिमाचल प्रदेश स्टेट फाइनेंस कॉर्पोरेशन रखने जा रही है। यह एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में कार्य करेगी। इसके संचालन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आवश्यक पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त किया जाएगा।
नई फाइनेंस कंपनी का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न बोर्डों और निगमों की वित्तीय गतिविधियों का समन्वय करना होगा। यह संस्था सरकारी उपक्रमों के बजट, खर्च, फंड मैनेजमेंट और वित्तीय संसाधनों की निगरानी करेगी। हालांकि बोर्ड और निगम अपने कार्यों के लिए धन का उपयोग पहले की तरह कर सकेंगे, लेकिन उनकी वित्तीय गतिविधियों का समग्र प्रबंधन एक ही मंच से किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 23 सार्वजनिक उपक्रम कार्यरत हैं। इनमें से 13 उपक्रम घाटे में चल रहे हैं, जबकि 10 उपक्रम लाभ की स्थिति में हैं। इन संस्थानों में लगभग 30 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। घाटे वाले प्रमुख उपक्रमों में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड और हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) भी शामिल हैं।
अभी तक अलग-अलग बोर्ड और निगम अपने वित्तीय संसाधन विभिन्न बैंकों में संचालित करते हैं। नई फाइनेंस कंपनी बनने के बाद इन संस्थानों की वित्तीय स्थिति का समग्र आकलन करना सरकार के लिए अधिक आसान होगा। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, नकदी प्रवाह का प्रबंधन और भविष्य की वित्तीय रणनीति तैयार करने में भी सहायता मिलेगी।
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सरकार जिस संस्था का गठन करने जा रही है, वह एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) होगी। ऐसी कंपनियां बैंक नहीं होतीं, लेकिन वित्तीय सेवाएं प्रदान कर सकती हैं। इनके संचालन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कंपनी का गठन होने के बाद आरबीआई की मंजूरी मिलने पर यह संस्था औपचारिक रूप से कार्य शुरू करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सरकारी उपक्रमों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार को प्रत्येक बोर्ड और निगम की आर्थिक स्थिति, नकदी उपलब्धता और वित्तीय आवश्यकताओं की वास्तविक तस्वीर एक ही मंच पर मिल सकेगी, जिससे भविष्य की आर्थिक योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।