#विविध
July 24, 2026
हिमाचल को चकाचक करेगा मंत्री विक्रमादित्य सिंह का विभाग- सड़क हाद...सों पर लगेगी लगाम
रोड सेफ्टी ऑडिट पॉलिसी लागू, पांच चरणों में होगा सुरक्षा ऑडिट
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सड़क सुरक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग की कमान संभाल रहे मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग में अब हर बड़ी सड़क परियोजना का वैज्ञानिक रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होगा।
सरकार की नई नीति के तहत सड़क निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और सड़क शुरू होने से पहले सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित व आधुनिक बनाना है।
दरअसल, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग यानी PWD के अधीन आने वाली सड़कों के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट पॉलिसी लागू करने को मंजूरी दे दी है। इस नई नीति का उद्देश्य सड़क निर्माण की गुणवत्ता बढ़ाने, दुर्घटनाओं में कमी लाने और सड़क परियोजनाओं को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग के माध्यम से इस नीति को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि सड़क सुरक्षा को केवल निर्माण तक सीमित रखने के बजाय योजना से लेकर रखरखाव तक हर चरण में प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
नई नीति के तहत सड़क परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट केवल निर्माण पूरा होने के बाद नहीं, बल्कि पूरे विकास चक्र के दौरान किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए पांच महत्वपूर्ण चरण तय किए हैं। इनमें परियोजना की व्यवहार्यता और प्रारंभिक डिजाइन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR, निर्माण कार्य के दौरान निरीक्षण, सड़क को यातायात के लिए खोलने से पहले अंतिम सुरक्षा परीक्षण और पहले से बनी सड़कों का समय-समय पर ऑडिट शामिल रहेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य संभावित खतरों की पहचान पहले ही कर लेना है, ताकि सड़क शुरू होने से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें। सड़क सुरक्षा ऑडिट के दौरान सड़क की डिजाइन, मोड़, चौराहे, सड़क की चौड़ाई, संकेतक बोर्ड, रोड मार्किंग, स्ट्रीट लाइट, रेलिंग और सुरक्षा बैरियर जैसे सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जाएगी।
इसके अलावा पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और अन्य संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध सुविधाओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा। निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा, ट्रैफिक डायवर्जन योजना और पहले दिए गए सुरक्षा सुझावों के पालन की भी समीक्षा की जाएगी। सड़क को जनता के लिए खोलने से पहले दिन और रात दोनों समय निरीक्षण किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते दूर किया जा सके।
नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक रोड सेफ्टी सेल स्थापित किया जाएगा। यह विशेष प्रकोष्ठ प्रदेशभर में चल रहे सड़क सुरक्षा ऑडिट की निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी परियोजनाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।
सरकार ने यह भी तय किया है कि एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में कुल परियोजना लागत का एक प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए निर्धारित किया जाएगा। इससे सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। राज्य सरकार ने दावा किया है कि सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में प्रदेश में 2,253 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 2,107 रह गई। यानी दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसी तरह सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या भी कम हुई है। वर्ष 2023 में 892 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा घटकर 806 रह गया। वहीं घायलों की संख्या भी 3,449 से घटकर 3,290 दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल में ऐसा सड़क नेटवर्क तैयार करना है जो सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट व्यवस्था लागू होने से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में भी मदद मिलेगी।