सोलन। हिमाचल प्रदेश के सरकारी डिपो से मिलने वाला राशन अब खाने लायक नहीं रहा है। ताजा मामला सोलन जिले से कसौली क्षेत्र से सामने आया है- जहां गरीब परिवारों को मिलने वाले राशन में खामी पाई गई है।
गरोबों के साथ मजाक
खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) और BPL कार्डधारकों को मिलने वाला गेहूं और चावल दोनों ही घटिया गुणवत्ता के निकल रहे हैं। राशन में कंकड़-पत्थरों की भरमार है- तो कई बोरियों में गेहूं घुन लगा हुआ मिल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है।
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कंकड़ों से भरे चावल
गरीब तबका जो पूरी तरह सरकारी सस्ते राशन पर निर्भर है, वह इस स्थिति से बेहद परेशान है। कई परिवारों ने शिकायत की है कि उन्हें डिपो से जो चावल दिया जा रहा है, उसमें इतने कंकड़ होते हैं कि उसे साफ करते-करते आधे से ज्यादा चावल निकल ही जाते हैं। वहीं, गेहूं इतना खराब है कि उसका आटा बनाने पर बदबू आती है और रोटियां भी सख्त बनती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार गरीबों की मदद के नाम पर केवल औपचारिकता निभा रही है। डिपो संचालकों को जैसे राशन मिलता है, वैसा ही आगे दे दिया जाता है। न तो कोई गुणवत्ता जांच होती है और न ही कोई जवाबदेही तय है। यह स्थिति तब है जब सरकार हर महीने करोड़ों रुपये खाद्य आपूर्ति और वितरण पर खर्च कर रही है।
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भेजा जा रहा खराब अनाज
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि डिपो में मिलने वाले राशन की समय-समय पर सख्त जांच हो और जो सप्लायर खराब अनाज भेज रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उपभोक्ताओं को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे खराब राशन को तुरंत वापस कर सकें।
परेशानी में गरीब परिवार
अगर समय रहते स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह योजना गरीबों की मदद की बजाय उनकी परेशानी का कारण बन जाएगी। लोगों का विश्वास सरकारी व्यवस्था से उठता जा रहा है, जिसे फिर से बहाल करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
