शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार जो कि आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है। सरकार ने शानन पावर प्रोजेक्ट को पंजाब से वापस लेने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इस परियोजना से राज्य को सालाना 200 करोड़ रुपए की आय हो सकती है। इसके लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी।

99 साल की लीज पर दिया गया था प्रोजेक्ट

यह पावर प्रोजेक्ट अंग्रेजी शासनकाल का है और इसे 99 साल की लीज पर दिया गया था। जिसकी अवधि मार्च 2024 में पूरी हो चुकी है। हिमाचल सरकार का दावा है कि अब इस परियोजना पर उसका हक बनता है। मगर पंजाब सरकार इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यह भी पढ़ें: हिमाचल में निकली बंपर भर्ती, 200 युवाओं को मिलेगी नौकरी; 19,500 मिलेगा वेतन

185 से 200 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय की आस

सुक्खू सरकार ने इस मामले में अपने पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करने के लिए जाने-माने वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी को नियुक्त किया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने जेएसडब्ल्यू (जिंदल स्टील वर्क्स) के पावर प्रोजेक्ट में रॉयल्टी की बढ़ोतरी से जुड़े मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यदि यह मामला हिमाचल के पक्ष में आता है तो इससे भी राज्य को सालाना 185 से 200 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती है।

सीएम सुक्खू का दावा 2027 तक आत्मनिर्भर बनेगा प्रदेश

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का दावा है कि राज्य को 2027 तक आत्मनिर्भर बना दिया जाएगा। राज्य सरकार ने वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिनमें ग्रामीण इलाकों में मुफ्त पानी की सुविधा समाप्त करना और बिजली सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से खत्म करना शामिल है। यह भी पढ़ें : हिमाचल : 10वीं पास को मिलेगी नौकरी, भरे जाएंगे 150 पद, जानें पूरी डिटेल

साल 1932 में बना है शानन पावर प्रोजेक्ट

शानन पावर प्रोजेक्ट का ऐतिहासिक महत्व है, जो मंडी जिले के जोगिंदर नगर में स्थित है। इसे 1932 में केवल 48 मेगावाट क्षमता के साथ शुरू किया गया था। मगर अब इसकी उत्पादन क्षमता 110 मेगावाट तक बढ़ा दी गई है।

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