शिमला। हिमाचल प्रदेश में बिजली व्यवस्था में बदलाव के तहत लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब लोगों के साथ-साथ सरकारी विभागों के लिए भी परेशानी का कारण बनने लगे हैं। खासकर सरकारी स्कूलों में लगाए गए स्मार्ट मीटर के बाद बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी सामने आ रही है। कई स्कूलों में पहले के मुकाबले चार से पांच गुना तक ज्यादा बिल आने लगे हैं] जिससे प्रदेश सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की नीति पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सरकारी स्कूलों में बढ़ा बिजली बिल का बोझ

प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में हाल ही में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। लेकिन इन मीटरों के लगने के बाद बिजली का खर्च अचानक बढ़ गया है। शिक्षकों के अनुसार जिन स्कूलों में पहले मामूली बिल आता था] वहां अब हजारों और कई जगहों पर 10 हजार रुपये तक के बिल आने लगे हैं। स्थिति यह है कि केवल चार कमरों वाले एक स्कूल का बिजली बिल करीब 37 हजार रुपये तक पहुंच गया है] जिससे स्कूल प्रशासन के सामने भुगतान की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

 

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प्रीपेड व्यवस्था से बढ़ी परेशानी

स्मार्ट मीटर के साथ लागू की गई प्रीपेड प्रणाली ने स्कूलों की मुश्किल और बढ़ा दी है। इस व्यवस्था में बिजली इस्तेमाल करने से पहले ही भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में जिन स्कूलों के पास पर्याप्त बजट नहीं है] वहां बिजली कनेक्शन कटने का खतरा भी मंडराने लगा है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो स्कूलों में पढ़ाई और अन्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

सीमित अनुदान में नहीं हो पा रही भरपाई

शिक्षा विभाग के कई स्कूलों में बिजली बिल का भुगतान समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाली ग्रांट से किया जाता है। लेकिन अब बढ़े हुए बिलों के कारण यह अनुदान पर्याप्त नहीं पड़ रहा है। कई शिक्षकों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सालभर के बिजली बिल का भुगतान उपलब्ध फंड से करना लगभग असंभव हो जाएगा।

 

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स्कूलों में बिजली की खपत स्वाभाविक

शिक्षकों का कहना है कि आजकल स्कूलों में पढ़ाई के लिए कई आधुनिक संसाधनों का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। कक्षाओं में एलईडी लाइट, पंखे, शिक्षण पैनल, कम्प्यूटर और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन सभी उपकरणों के चलते बिजली की खपत होना स्वाभाविक है और इसे कम करना संभव नहीं है।

सरकार से मांगी गई स्थायी व्यवस्था

इस पूरे मुद्दे को लेकर राजकीय टीजीटी कला संघ ने प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त की है। संघ का कहना है कि यदि स्कूलों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं तो बिजली बिल के भुगतान के लिए भी स्थायी बजट की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका सुझाव है कि सरकार इस मद में प्रतिमाह निर्धारित बजट तय करे और बिजली बिल का भुगतान सीधे शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जाए।

 

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मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को भेजा ज्ञापन

संघ की ओर से इस संबंध में मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन भी भेजा गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि स्कूलों के बिजली और पानी के कनेक्शन कटने की स्थिति न बने, इसके लिए सरकार जल्द समाधान निकाले। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया जाता तो स्कूलों में स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

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