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March 9, 2026

संजौली मस्जिद विवाद: 3 मंजिलें गिराई, अब 2 मंजिलों की बारी! हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

हाईकोर्ट में आज वक्फ बोर्ड ने दी जानकारी, 6 अप्रैल को आएगा बड़ा फैसला

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sanjauli maszid

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लंबे समय से चर्चा में रहे संजौली मस्जिद विवाद में अब एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कभी दो समुदायों को आमने-सामने लाने वाले इस संवेदनशील मामले में आज उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद स्थिति में अहम बदलाव देखने को मिला है। मस्जिद की विवादित तीन ऊपरी मंजिलों को पूरी तरह से गिरा दिया गया है। अब सभी की नजरें उस फैसले पर टिकी हैं, जिसमें मस्जिद की बची हुई दो निचली मंजिलों के भविष्य का फैसला होना है।

अदालत को दी गई आदेश पालन की जानकारी

सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन कर दिया है। मस्जिद की तीन ऊपरी मंजिलों को हटा दिया गया है। इसके साथ ही अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि अब इमारत में केवल दो निचली मंजिलें ही शेष बची हैं। इन मंजिलों को लेकर मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय छह अप्रैल को होने वाली सुनवाई में आने की संभावना है।

 

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निचली दो मंजिलों पर फिलहाल राहत

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय की ओर से निचली दो मंजिलों को गिराने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक जारी है। इस कारण मस्जिद की शेष संरचना को अभी यथावत रखा गया है। अब आगामी सुनवाई में यह तय होगा कि इन मंजिलों को वैध माना जाएगा या फिर इन्हें भी हटाने का आदेश दिया जाएगा। इसी फैसले को लेकर पूरे प्रदेश में उत्सुकता और चर्चा बनी हुई है।

कैसे शुरू हुआ था यह विवाद

इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में शिमला के मतियाणा क्षेत्र में हुई एक घटना के बाद हुई थी। वहां कुछ युवकों की पिटाई की घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए। इसके बाद संजौली क्षेत्र में स्थित मस्जिद के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया और अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया गया।

 

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मस्जिद कमेटी ने खुद हटाने की दी थी पेशकश

विवाद बढ़ने के बाद मस्जिद कमेटी ने भी आगे बढ़कर अवैध बताए जा रहे हिस्से को स्वयं हटाने की पेशकश की थी। इसके बाद नगर निगम आयुक्त की अदालत ने जांच के बाद मस्जिद की तीन ऊपरी मंजिलों को हटाने की अनुमति दे दी। इस निर्णय को चुनौती देने के लिए संबंधित पक्ष अदालत पहुंचे, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई।

निचली मंजिलों को भी अवैध बताया गया था

कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी तो बाद में नगर निगम आयुक्त की अदालत ने मस्जिद की निचली दो मंजिलों को भी अवैध करार दिया। इस फैसले के खिलाफ भी अपील दायर की गई, लेकिन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने भी उस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां से निचली मंजिलों को लेकर अस्थायी राहत मिली।

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छह अप्रैल को होगा अहम फैसला

अब इस पूरे विवाद का अगला और शायद सबसे अहम पड़ाव छह अप्रैल को आने वाला है। उस दिन होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि मस्जिद की बची हुई दो मंजिलों का क्या भविष्य होगा। इस कारण पूरे प्रदेश की निगाहें इस मामले पर टिकी हुई हैं और लोग न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

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