शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक बेटे ने छोटी उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया। पिता की मौत के बाद अनुकंपा आधार पर नौकरी पाने के लिए उन्होंने करीब 25 साल तक अपने हक की लड़ाई लड़ी। आखिरकार हाई कोर्ट ने नवीन कुमार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें नौकरी देने का रास्ता साफ कर दिया है।
छोटी उम्र में ही उठ गया था माता-पिता का साया
यह मामला नवीन कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। नवीन कुमार के पिता अमर सिंह सुंदरनगर में बीबीएमबी के तहत नियमित बेलदार के पद पर कार्यरत थे। नौकरी के दौरान 21 दिसंबर 2001 को उनकी मौत हो गई। उस समय नवीन कुमार की उम्र महज 13 साल थी।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार का फरमान- 15 अगस्त को खुले रहेंगे स्कूल, बच्चों का आना भी अनिवार्य
पिता की मौत के समय नवीन के अलावा परिवार में उनकी दो नाबालिग बहनें भी थीं। परिवार पहले ही मां को खो चुका था। ऐसे में कम उम्र में ही परिवार के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई। पिता के निधन के बाद परिवार के लिए आर्थिक स्थिति संभालना भी चुनौती बन गया।
पिता की मौत के बाद नहीं पता था नौकरी के अधिकार का
पिता की मौत के समय नवीन कुमार खुद नाबालिग थे। उनकी दो बहनें भी नाबालिग थीं और परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े नियमों और कानूनी अधिकारों की जानकारी लेकर समय पर आवेदन कर सके।
यह भी पढ़ें : हिमाचल BJP के कद्दावर नेता का निधन : 3 बार रहे चुके विधायक- इलाके में शोक
नवीन का कहना था कि उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि पिता की नौकरी के दौरान मौत होने पर परिवार के किसी सदस्य को अनुकंपा आधार पर सरकारी नौकरी मिल सकती है। यही वजह रही कि उस समय नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया जा सका।
बालिग होने पर नौकरी मांगी, विभाग ने कर दिया इनकार
बालिग होने के बाद नवीन कुमार ने साल 2016 में अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया। लेकिन बीबीएमबी ने 24 जून 2025 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि पिता की मौत के करीब 22 साल बाद आवेदन किया गया है, जबकि विभाग की नीति के मुताबिक दो साल के भीतर आवेदन करना जरूरी था।
यह भी पढ़ें- संपत्ति विवाद पर CM सुक्खू का पलटवार : एक भी नई प्रॉपर्टी नहीं खरीदी, चाहें तो जांच करा लें
हाई कोर्ट ने विभाग की दलील नहीं मानी
मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने विभाग की दलील को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि अमर सिंह एक बेलदार थे और उनकी मौत के समय उनके बच्चे नाबालिग थे। ऐसे में उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि उन्हें अनुकंपा नियुक्ति के नियमों की पूरी जानकारी होगी।
परिवार को जानकारी देना विभाग की जिम्मेदारी
हाई कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारी की मौत के बाद सबसे पहले विभाग की जिम्मेदारी होती है कि वह परिवार को अनुकंपा नौकरी के अधिकार के बारे में बताए। अगर विभाग ऐसा नहीं करता, तो उसकी लापरवाही का नुकसान पीड़ित परिवार को नहीं उठाना चाहिए।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : ननद के घर रहने आई थी भाभी, पड़ोसी ने कर दिया कांड- 8 वर्षीय लड़की ने खोली पोल
नवीन कुमार को तुरंत नौकरी देने के आदेश
अदालत ने विभाग का आदेश रद्द करते हुए BBMB को निर्देश दिए कि नवीन कुमार की शैक्षणिक योग्यता और उनके पिता के पद को ध्यान में रखते हुए उन्हें जल्द से जल्द अनुकंपा आधार पर नियुक्ति दी जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी मानी जाएगी, जब नवीन कुमार ने पहली बार हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
