शिमला। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है। गुरुवार सुबह गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद 75 वर्षीय अभिनेता ने अंतिम सांस ली। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने काफी देर तक उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

 

नाना पाटेकर के जाने से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसकी पहचान सिर्फ उसके किरदारों से नहीं, बल्कि आवाज, संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और अभिनय की अपनी अलग शैली से बनी थी। उनके निधन की खबर के साथ हिमाचल प्रदेश और खासकर शिमला में उनकी दो साल पुरानी यादें भी ताजा हो गई हैं। 

जनवरी 2024 में नाना पाटेकर अपनी फिल्म ‘वनवास’ की शूटिंग के लिए शिमला पहुंचे थे। यह उनके लिए शिमला का पहला फिल्मी दौरा बताया गया था।

 

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नाना पाटेकर ने फिल्म में पिता का किरदार निभाया था, जबकि उत्कर्ष शर्मा उनके बेटे की भूमिका में नजर आए। सिमरत कौर और राजपाल यादव समेत फिल्म की पूरी टीम भी शूटिंग के लिए हिमाचल पहुंची थी। उस दौरान शिमला की वादियां सिर्फ फिल्म के दृश्यों का हिस्सा नहीं बनीं, बल्कि कलाकारों और पूरी यूनिट के लिए भी एक ऐसी स्मृति छोड़ गईं, जिसे अब नाना पाटेकर के निधन के बाद नए भाव से याद किया जा रहा है।

कैमरे के सामने नाना, पीछे हिमाचल की खूबसूरती

शिमला में शूटिंग के दौरान फिल्म यूनिट ने शहर के कई प्रमुख स्थानों पर काम किया। एक तरफ कैमरे के सामने नाना पाटेकर अपने किरदार में दिखाई देते थे तो दूसरी तरफ कैमरे के पीछे हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता फिल्म के दृश्यों को खास बना रही थी।

 

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मशोबरा के शांत वातावरण से लेकर कुफरी और नालदेहरा के पहाड़ी इलाकों तक शूटिंग का सिलसिला चला। स्थानीय लोगों में भी फिल्म की शूटिंग को लेकर खास उत्सुकता थी। लोग दूर से फिल्मी सितारों को देखने पहुंचते थे और कई लोगों के लिए नाना पाटेकर को अपने बीच देखना किसी यादगार अनुभव से कम नहीं था।

 

मालरोड पर नाना को देखने उमड़ पड़ा था शिमला

नाना पाटेकर की शिमला यात्रा का एक खास अध्याय मालरोड से जुड़ा है। जब यहां फिल्म की शूटिंग शुरू हुई तो स्थानीय लोगों और पर्यटकों को जैसे ही पता चला कि नाना पाटेकर शूटिंग कर रहे हैं, उन्हें देखने के लिए भीड़ जुटने लगी।

 

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सीटीओ चौक के आसपास फिल्म के एक दृश्य के लिए स्टॉल तैयार किया गया था। यहां आइसक्रीम से जुड़ा सीन फिल्माया गया। शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर की मौजूदगी ने मालरोड की सामान्य रौनक को कुछ समय के लिए फिल्मी माहौल में बदल दिया था। कड़ी सुरक्षा के बीच शूटिंग हुई और फिल्म यूनिट ने शिमला के अन्य हिस्सों में भी अपने दृश्य फिल्माए।

रिज मैदान पर हिमाचली संस्कृति के रंग में रंगा शूट

नाना पाटेकर की हिमाचल से जुड़ी यादों में रिज मैदान का भी खास स्थान रहा। यहां फिल्म के एक गीत की शूटिंग की गई, जिसमें हिमाचल की स्थानीय संस्कृति को प्रमुखता से दिखाया गया। हिमाचली पारंपरिक परिधान, पहाड़ी टोपी, नाटी और ढोल-नगाड़ों के बीच फिल्माए गए दृश्यों में स्थानीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। स्थानीय लोगों को भी शूटिंग का हिस्सा बनाया गया। इस तरह शिमला का रिज मैदान केवल फिल्म का लोकेशन नहीं रहा, बल्कि हिमाचल की संस्कृति को पर्दे तक पहुंचाने वाला एक दृश्यात्मक मंच भी बन गया।

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स्थानीय लोगों के बीच सहज नजर आते थे नाना पाटेकर

बड़े पर्दे पर अपने दमदार और गंभीर अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर का शिमला प्रवास उनके सहज व्यवहार के लिए भी याद किया जाता है। शूटिंग से समय मिलने पर वह स्थानीय लोगों और कलाकारों के साथ बातचीत करते नजर आते थे। हिमाचल के स्थानीय कलाकारों को उनके साथ काम करने और उनके अभिनय के तरीके को करीब से देखने का मौका मिला। उनके अनुभव और सहज व्यवहार ने शूटिंग से जुड़े लोगों पर अपनी छाप छोड़ी। यही वजह रही कि नाना पाटेकर के लिए शिमला भले ही फिल्म शूटिंग की एक लोकेशन रहा हो, लेकिन यहां के लोगों के लिए उनका आना एक यादगार घटना बन गया।

 

नाना पाटेकर ने सराही थी हिमाचल की मेहमाननवाजी 

नाना पाटेकर के हिमाचल प्रवास के दौरान मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास ‘द रिट्रीट’ में आयोजित कार्यक्रम भी उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए नाना पाटेकर ने हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता और यहां के लोगों की सादगी तथा मेहमाननवाजी की सराहना की थी। 

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उनके लिए हिमाचल की खूबसूरती सिर्फ फिल्म के कैमरे में कैद होने वाला दृश्य नहीं थी। पहाड़ों के शांत वातावरण और यहां के लोगों की सहजता ने भी उनका ध्यान खींचा था। उनके द्वारा हिमाचल को लेकर कही गई बातें आज उनके प्रशंसकों के लिए पुरानी लेकिन भावुक कर देने वाली याद बन गई हैं।

नाना पाटेकर के अभिनय की अपनी अलग पहचान

नाना पाटेकर का फिल्मी सफर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने मुख्यधारा के सिनेमा में काम करने के साथ-साथ ऐसे किरदारों को भी पर्दे पर उतारा, जिनमें गंभीरता, संवेदना और यथार्थ का गहरा असर दिखाई देता था। ‘अंकुश’, ‘प्रहार’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘राजनीति’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग अंदाज दर्शकों ने देखे।

 

उनकी संवाद अदायगी और किरदार में उतर जाने की क्षमता ने उन्हें हिंदी सिनेमा के विशिष्ट कलाकारों की कतार में खड़ा किया। उनकी खासियत यह रही कि वह किरदार को केवल संवादों के जरिए नहीं, बल्कि अपनी आवाज, हावभाव और भावनाओं के जरिए भी जीवंत कर देते थे।

 

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संजय सूद ने कहा—नाना ने अभिनय को संवेदनाओं से जोड़ा

नाना पाटेकर के निधन पर शिमला के रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता संजय सूद ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर की भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान रही और उनका अपना विशिष्ट दर्शक वर्ग था। संजय सूद के अनुसार, नाना की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने अभिनय को केवल संवाद अदायगी तक सीमित नहीं रखा। उनके किरदारों में जीवन की वास्तविकता और मानवीय संवेदनाओं की झलक दिखाई देती थी। जब वह किसी भूमिका को पूरी शिद्दत से निभाते थे तो दर्शक उस किरदार से जुड़ जाते थे।

शिमला में शूटिंग के वे दिन अब यादों में रह गए

नाना पाटेकर का हिमाचल से जुड़ाव अपेक्षाकृत कम समय का था, लेकिन वर्ष 2024 की उनकी शिमला यात्रा ने कई यादें छोड़ दीं। मालरोड पर जुटी भीड़, रिज मैदान पर हिमाचली संस्कृति के बीच शूटिंग, मशोबरा की शांत वादियां और स्थानीय लोगों के साथ उनका सहज व्यवहार—ये सभी पल अब उनके प्रशंसकों के लिए खास मायने रखते हैं।

 

दो साल पहले जिन पहाड़ी रास्तों से होकर नाना पाटेकर फिल्म की शूटिंग के लिए गुजरे थे, आज उन्हीं जगहों से उनकी यादें जुड़ गई हैं। जिस शिमला में वह कैमरे के सामने एक किरदार को जीवंत कर रहे थे, वही शिमला अब उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में याद कर रहा है, जिसने अपने अभिनय से कई पीढ़ियों के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।

 

हिमाचल की वादियों में नाना पाटेकर का प्रवास भले ही कुछ समय का रहा, लेकिन पहाड़ों में बिताए वे दिन अब उनकी फिल्मी विरासत से जुड़ी ऐसी याद बन चुके हैं, जिन्हें शिमला और हिमाचल के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

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