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October 8, 2026

हिमाचल: अब सड़क पर कटेगा चालान तो मौके पर होगा डिजिटल भुगतान; जानें सुक्खू सरकार की नई व्यवस्था

परिवहन विभाग को बैंकों से मिलेंगी पीओएस मशीने, सीधे राज्य कोष में जमा होगी राशि

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himachal CHallan

शिमला। हिमाचल प्रदेश अब धीरे-धीरे डिजिटल व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बैंकिंग से लेकर सरकारी सेवाओं और रोजमर्रा के लेन-देन तक डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में अब परिवहन व्यवस्था को भी डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सड़क पर वाहन का चालान कटने के बाद उसकी राशि जमा करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी जल्द बीते जमाने की बात होगी। अब वाहन चालक चालान कटने के स्थान पर ही डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।

 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार, 7 अक्टूबर को 'चालान 2 पे' पहल की शुरुआत की। इस व्यवस्था के तहत परिवहन विभाग के अधिकारियों को बैंक की ओर से पीओएस (Point of Sale) मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इनके माध्यम से चालान की राशि मौके पर ही सुरक्षित डिजिटल तरीके से जमा की जा सकेगी। हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और भुगतान की राशि सीधे राज्य कोष में जमा होगी।

 

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दफ्तरों के नहीं लगाने पड़ें चक्कर

अब तक सड़क पर चालान कटने के बाद कई मामलों में वाहन चालकों को चालान की राशि जमा करने के लिए संबंधित कार्यालय या निर्धारित माध्यम का सहारा लेना पड़ता था। नई डिजिटल व्यवस्था से यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। चालान कटते ही मौके पर डिजिटल भुगतान और वहीं भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इससे वाहन चालकों का समय बचेगा और चालान निपटाने की प्रक्रिया भी अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी होगी। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होने के कारण भुगतान से जुड़ी जानकारी को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

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'चालान 2 पे' से राजस्व व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार की इस पहल का एक अहम उद्देश्य राजस्व संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाना भी है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से नकद लेन-देन में कमी आएगी और चालान से प्राप्त राशि सीधे सरकारी खजाने में जमा होगी। डिजिटल रिकॉर्ड रहने से राशि के लेन-देन की निगरानी आसान होगी। इससे राजस्व के गबन, हेराफेरी या राजस्व नुकसान की संभावनाओं पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। यानी नई व्यवस्था सिर्फ वाहन चालकों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी कदम है।

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एचआरटीसी के बेड़े में शामिल होंगी 1500 नई ई-बसें

डिजिटल परिवहन व्यवस्था के साथ ही सरकार ने हिमाचल पथ परिवहन निगम यानी एचआरटीसी के बेड़े को बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक करने की भी योजना सामने रखी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एचआरटीसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा के दौरान कहा कि आने वाले समय में राज्य सरकार निगम को 1500 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाएगी।

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इन बसों की न्यूनतम रेंज करीब 350 किलोमीटर रखने की योजना है। बसों का चयन हिमाचल के पहाड़ी इलाकों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी के मार्गों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सरकार के अनुसार, एचआरटीसी को अब तक 297 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। इसके अलावा निगम को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

100 ग्रीन हाइड्रोजन और 100 सुपर डीलक्स बसों की भी तैयारी

एचआरटीसी के आधुनिकीकरण की योजना सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों तक सीमित नहीं है। सरकार 100 ग्रीन हाइड्रोजन बसें और 100 सुपर डीलक्स बसें खरीदने की तैयारी भी कर रही है। 
इससे आने वाले समय में हिमाचल के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं वाली बसों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

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ई-बसों से हर किलोमीटर 18.19 रुपये की बचत

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी हिमाचल की जीवन रेखा है और प्रदेश के दूरदराज तथा दुर्गम क्षेत्रों में भी लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों का संचालन केवल पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे निगम की आर्थिक स्थिति को भी फायदा मिल रहा है। सरकार के अनुसार, ई-बसों के संचालन से एचआरटीसी को प्रति किलोमीटर 18.19 रुपये की बचत हो रही है।

प्रदेश में तेजी से बढ़ेगा ई-चार्जिंग नेटवर्क

इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता में है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेशभर में ई-चार्जिंग अधोसंरचना विकसित करने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। एचआरटीसी के अधिकारियों को 30 ई-वाहन उपलब्ध करवाने की योजना भी है। इसके अलावा ऊना जिले और नालागढ़ स्थित क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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पांच साल में परिवहन विभाग की कमाई करीब दोगुनी

परिवहन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विभाग के राजस्व में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में परिवहन विभाग का राजस्व 510 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 995 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह पांच वर्षों में विभाग के राजस्व में 485 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विभाग में खाली पड़े पदों को भरने के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

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