शिमला। हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों में लगातार हो रही देरी पर सुक्खू सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत अब किसी भी ठेकेदार को दो से ज्यादा काम नहीं दिए जाएंगे।
सड़क निर्माण में देरी पर सुक्खू सरकार का एक्शन
सरकार का मानना है कि एक ही ठेकेदार को कई परियोजनाएं सौंपने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें समय पर तैयार नहीं हो पा रही थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभागीय अधिकारियों को भी सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
यह भी पढ़ें : 'सुक्खू सरकार के दावों की खुली पोल' : नहीं हुआ पुरुषों का बच्चेदानी ऑपरेशन, RTI में खुलासा
नहीं मिलेंगे 2 से ज्यादा काम
नई व्यवस्था के अनुसार, अब किसी भी ठेकेदार को एक समय में अधिकतम केवल दो ही कार्य आबंटित किए जाएंगे। अगर किसी विशेष परिस्थिति में किसी ठेकेदार को दो से अधिक काम देने की आवश्यकता पड़ती है- तो इसके लिए राज्य सरकार से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ऐसे मामलों को मेरिट और कार्य क्षमता के आधार पर परखा जाएगा।
मिल रही थी कई शिकायतें
सरकार की ओर से यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों में लगातार हो रही देरी और अधूरे पड़े प्रोजेक्टों को देखते हुए उठाया गया है। लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ ठेकेदार एक साथ कई परियोजनाएं ले लेते हैं। मगर संसाधनों और मशीनरी की कमी के कारण समय पर काम पूरा नहीं कर पाते। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और लोगों की सुविधाओं पर पड़ रहा था।
यह भी पढ़ें : डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री नहीं बचा पाए अपना इलाका, टाहलीवाल में कांग्रेस को मिली हार; भाजपा जीती
आदेश जारी किए गए हैं
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग के सचिव की ओर से इस संबंध में प्रमुख अभियंता को औपचारिक आदेश जारी किए गए हैं। इसके बाद इंजीनियर-इन-चीफ कार्यालय ने प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी भेज दिए हैं।
नई व्यवस्था लागू
लोक निर्माण विभाग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। आगामी टेंडर प्रक्रिया और कार्य आबंटन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी ठेकेदार को निर्धारित सीमा से अधिक काम न मिले। अगर किसी परियोजना में विशेष परिस्थिति उत्पन्न होती है, तभी मामला सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में कल से बदलेगा मौसम : अगले 3 दिन बारिश, तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने के आसार
निर्माण कार्यों में देरी का मुद्दा
दरअसल, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों में देरी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा था। कई विधायकों ने ग्रामीण इलाकों में सड़कों की धीमी रफ्तार और अधूरे प्रोजेक्टों पर चिंता जताई थी।
विधायकों ने पूछे कई सवाल
खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने भी निर्माण कार्यों की धीमी गति को लेकर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद CM सुक्खू ने व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने के संकेत दिए थे।
यह भी पढ़ें- IGMC के डॉक्टरों का कमाल : आंख में घुसी थी लकड़ी, ऑपरेशन कर बचाई 5 वर्षीय मासूम की रोशनी
छोटे ठेकेदारों को मिलेगा काम
CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग ने इस फैसले को अमलीजामा पहनाया है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों को भी काम करने का अवसर मिलेगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। साथ ही एक ठेकेदार पर अत्यधिक कार्यभार नहीं पड़ेगा, जिससे निर्माण कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे होने की संभावना बढ़ जाएगी।
लोगों को क्या उम्मीद?
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि सरकार के इस फैसले से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण की गति तेज होगी और दूरदराज गांवों को बेहतर सड़क सुविधाएं समय पर मिल सकेंगी। वहीं विभाग अब निर्माण कार्यों की निगरानी को भी और सख्त बनाने की तैयारी में है ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।
