शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली में बन रहे बल्क ड्रग पार्क के निर्माण में हो रही देरी अब केंद्र सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है। परियोजना की सुस्त रफ्तार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित मंत्रालयों, विभागों और क्रियान्वयन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण से जुड़ी सभी बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए और परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय ऑनलाइन बैठक में बल्क ड्रग पार्क सहित बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। बैठक में परियोजनाओं की धीमी रफ्तार, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी और जरूरी कार्यों में देरी जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। हिमाचल के लिए चिंता इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि हरोली में बन रहे पार्क को मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि मौजूदा प्रगति को देखते हुए इसके वर्ष 2028 तक पूरा होने की आशंका जताई जा रही है।
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मार्च 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
ऊना जिले के हरोली में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क को हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास की एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके निर्माण से दवा उद्योग को बढ़ावा मिलने और फार्मा क्षेत्र से जुड़े निवेश के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं विकसित होने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना को समय पर पूरा करने की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है।
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निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक मार्च 2027 तक पार्क का निर्माण पूरा किया जाना है। इसके विपरीत, निर्माण कार्यों की मौजूदा स्थिति को लेकर हुई समीक्षा में यह चिंता सामने आई है कि परियोजना को पूरा होने में वर्ष 2028 तक का समय लग सकता है। यदि देरी की आशंका सही साबित होती है, तो निर्धारित समयसीमा से आगे निकलना तय माना जाएगा। यही वजह है कि परियोजना की रफ्तार बढ़ाने और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
पीएम मोदी ने विभागों और एजेंसियों से मांगा जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समीक्षा बैठक के दौरान संबंधित मंत्रालयों, विभागों और क्रियान्वयन एजेंसियों से परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर सख्त सवाल किए। उन्होंने निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए जिम्मेदार विभाग तत्काल समन्वय स्थापित करें। स्वीकृतियों, बुनियादी सुविधाओं और अन्य लंबित प्रक्रियाओं के कारण परियोजनाओं की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
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प्रधानमंत्री का जोर केवल समीक्षा बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर परिणाम सुनिश्चित करने पर रहा। उन्होंने समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और प्रत्येक महत्वपूर्ण गतिविधि के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने की स्थिति न बने।
30 दिन के भीतर नए लक्ष्य तय करने के निर्देश
बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों को अगले 30 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और निर्माण कार्यों के संशोधित लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कौन-सा काम किस विभाग या एजेंसी के जिम्मे है और उसे पूरा करने की समयसीमा क्या होगी।
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परियोजना की प्रगति पर निगरानी के लिए पीएम गति शक्ति पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर पखवाड़े प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इससे काम की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और देरी की वजहों को समय रहते पहचानने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिजली, पानी और जरूरी सुविधाओं के काम में देरी बड़ी चुनौती
हरोली बल्क ड्रग पार्क के निर्माण में भूमि समतलीकरण, बिजली के सब-स्टेशन और पानी की पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं अहम हैं। इन कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए कई विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन्हीं कार्यों में तालमेल की कमी के कारण परियोजना की समयसीमा प्रभावित होती रही है।
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प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक में साझा सुविधाओं के निर्माण को भी गति देने पर जोर दिया गया। इनमें कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, स्टीम जनरेशन सुविधा, टेस्टिंग लैब और वेयरहाउसिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन सुविधाओं के टेंडर और निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पार्क में निवेश करने वाले उद्योगों को जरूरी आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराया जा सके।
देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने पर जोर
परियोजनाओं में लगातार देरी को देखते हुए संबंधित नोडल एजेंसियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लंबित कार्यों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो और समयसीमा का पालन किया जाए। बल्क ड्रग पार्क जैसी बड़ी परियोजना में देरी का असर केवल निर्माण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहता। इससे उद्योगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने, निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने और परियोजना से मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में निगरानी के साथ-साथ समयबद्ध क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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हिमाचल के साथ गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी बन रहे पार्क
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में वित्तीय प्रोत्साहन योजना के तहत देश के तीन राज्यों में बल्क ड्रग पार्क स्थापित करने की मंजूरी दी थी। हिमाचल प्रदेश के अलावा गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी ये पार्क विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे में ऊना के हरोली में बन रहे पार्क की प्रगति हिमाचल के लिए खास महत्व रखती है। परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए अब निर्माण से जुड़ी बाधाओं को दूर करना, विभागीय समन्वय मजबूत करना और प्रत्येक कार्य की नियमित निगरानी करना जरूरी होगा।
अब नजर मार्च 2027 की समयसीमा पर
प्रधानमंत्री की नाराजगी और सख्त निर्देशों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग और एजेंसियां निर्माण कार्यों में तेजी लाकर मार्च 2027 की निर्धारित समयसीमा को पूरा कर पाएंगी। अगले 30 दिनों में तय होने वाले संशोधित लक्ष्य और पाक्षिक निगरानी व्यवस्था परियोजना की दिशा स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हरोली बल्क ड्रग पार्क हिमाचल के औद्योगिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है। अब चुनौती इसे घोषणाओं और निर्धारित लक्ष्यों से आगे बढ़ाकर समय पर तैयार करने की है। केंद्र की समीक्षा के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण की सुस्त रफ्तार कितनी तेजी से बदलती है और परियोजना तय समयसीमा के कितने करीब पहुंच पाती है।
