शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां लंबे समय से आउटसोर्स आधार पर कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इन शिक्षकों को नियमित करने के आदेश जारी किए हैं।

कोर्ट ने तय की सीमा

बतौर रिपोर्टर्स, अदालत ने कहा कि इन्हें भी वही अधिकार मिलेंगे, जो पहले पीटीए (पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन), ग्रामीण विद्या उपासकों (जीवीयू) और प्राथमिक सहायक अध्यापकों (पीएटी) को दिए गए थे।

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न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने वर्ष 2016 में मनोज कुमार शर्मा सहित 21 शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सरकार की निष्क्रियता अब और नहीं चलेगी। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका दाखिल करने की तिथि से ही इन शिक्षकों को नियमित माना जाए और 12 हफ्तों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए।

शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से वर्षों तक काम करने वाले इन शिक्षकों की सेवाओं की प्रकृति स्थायी थी। केवल एजेंसियों के बदल जाने से उनके योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि अन्य श्रेणियों जैसे जीवीयू, पीटीए और पीएटी के शिक्षकों की तरह कंप्यूटर शिक्षकों को भी लंबे समय से राज्य की शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा मानते हुए स्थायी दर्जा दिया जाना चाहिए।

अदालत ने उचित ठहराई दलील

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि वे बीते दो दशकों से अधिक समय से शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और उनके द्वारा दी गई सेवाओं को नज़रअंदाज़ करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने इस दलील को उचित ठहराते हुए कहा कि यह स्पष्ट भेदभाव है कि अन्य श्रेणियों को नियमित कर दिया गया, लेकिन आउटसोर्स के माध्यम से लगे कंप्यूटर शिक्षकों को उनके अधिकार से वंचित रखा गया।

कंप्यूटर शिक्षकों में खुशी

हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेशभर के सैकड़ों कंप्यूटर शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अब सरकार को निर्देशों का पालन करते हुए तय समय में इन्हें नियमित करना होगा। यह फैसला न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए भी अहम माना जा रहा है।

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