शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, पहचान और स्कूल की एकरूपता पर भी खास जोर दिखाई देगा। सुक्खू सरकार ने प्रदेश में संचालित किए जा रहे डेढ़ सौ से अधिक सीबीएसई स्कूलों के लिए कई अहम नियम तय करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इन स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड होगा, शिक्षकों की दिन में तीन बार उपस्थिति दर्ज की जाएगी और स्कूल भवनों का रंग भी एक खास पैटर्न के तहत तय किया जाएगा।
1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम
सरकार की ओर से तय की जा रही यह व्यवस्था पहली अक्टूबर से लागू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को शिमला में शिक्षा विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को ड्रेस कोड, यूनिफॉर्म, स्कूल भवनों के रंग संयोजन समेत अन्य व्यवस्थाओं को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल की बेटी ने रचा इतिहास: कोरोना काल में शुरू किया ऐसा अनोखा काम; मिला नेशन बिल्डर अवॉर्ड
छात्रों और शिक्षकों की अलग होगी ड्रेस
सरकारी सीबीएसई स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड निर्धारित किया जाएगा। इससे स्कूल परिसर में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के साथ-साथ शिक्षकों और विद्यार्थियों की अलग पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। शिक्षकों को ड्रेस के लिए पांच हजार रुपये की राशि दिए जाने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। अब ड्रेस के स्वरूप और रंग को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिन में तीन बार लगेगी शिक्षकों की हाजिरी
इन स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी सरकार ने सख्ती का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों की दिन में तीन बार हाजिरी दर्ज की जाए।
सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में समय की पाबंदी और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके जरिए यह भी कोशिश है कि कक्षा में पढ़ाई का समय प्रभावित न हो और स्कूलों में जिम्मेदारी का माहौल मजबूत हो।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में निजी बस की ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राली से जोरदार टक्कर, 50 यात्री थे सवार; मची चीख-पुकार
स्कूल की बिल्डिंग भी देगी अलग पहचान
सरकार की योजना सिर्फ ड्रेस तक सीमित नहीं है। सीबीएसई स्कूलों की इमारतों का रंग संयोजन भी खास और विशिष्ट होगा। स्कूल भवनों के लिए किस तरह के रंगों का इस्तेमाल किया जाएगा और उनका संयोजन कैसा होगा, इसे शिक्षा विभाग को जल्द तय करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद प्रदेशभर के सरकारी सीबीएसई स्कूलों को एक समान और आकर्षक लुक देना भी माना जा रहा है। आने वाले समय में दूर से ही इन स्कूलों की अलग पहचान नजर आ सकती है।
यह भी पढ़े : 'जहां कलम की ताकत.. वहां चिल्लाने की जरूरत नहीं होती', मंत्री विक्रमादित्य ने कंगना रनौत पर कसा तंज
स्कूलों का LOGO भी होगा खास
मुख्यमंत्री ने बैठक में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सीबीएसई स्कूलों के LOGO को अंतिम रूप देने को लेकर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की। यानी इन स्कूलों की ड्रेस, भवन के रंग और लोगो—तीनों के जरिए एक अलग संस्थागत पहचान तैयार करने की कवायद चल रही है। बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर समेत शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षकों की कमी नहीं बनने दी जाएगी रुकावट
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। भविष्य में यदि किसी भी कारण से शिक्षक का पद खाली होता है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा, ताकि स्टाफ की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। सरकार की कोशिश है कि सीबीएसई स्कूलों को सिर्फ नाम के लिए सीबीएसई दर्जा न मिले, बल्कि वहां पढ़ाई, अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था भी उसी स्तर के अनुरूप विकसित हो।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: डेढ़ साल के मासूम और महिला की मौ**त; एक झटके में दो हंसते-खेलते परिवारों में पसरा मातम
अब स्कूलों में दिखेगा नया अनुशासन
सरकार के नए निर्देशों को देखें तो आने वाले समय में इन स्कूलों में सुबह से लेकर छुट्टी तक व्यवस्था पहले से ज्यादा व्यवस्थित नजर आ सकती है। एक तय ड्रेस, अलग शिक्षक यूनिफॉर्म, तीन बार उपस्थिति और खास रंग वाली स्कूल बिल्डिंग—ये व्यवस्थाएं सरकारी सीबीएसई स्कूलों को अलग पहचान देने की दिशा में बड़ा बदलाव मानी जा रही हैं।
