कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने स्थानीय लोगों को हैरान भी किया और भावुक भी कर दिया। पालमपुर शहर में बंदर के बच्चे की मौत के बाद बंदरों का झुंड इतना आक्रामक हो गया- कि उन्होंने एक परिवार को लगभग 24 घंटे तक घर में कैद रखा।
पाइप में फंसा बंदर का बच्चा
जानकारी के अनुसार एक बंदर का छोटा बच्चा घर की छत पर पहुंचने की कोशिश के दौरान जल निकासी के लिए लगी एक संकरी पाइप में फंस गया। पाइप इतनी संकरी थी कि वह न तो आगे बढ़ सका और न ही वापस निकल पाया।
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बंदरों के झुंड ने की बचाने की कोशिश
बच्चे के फंसने की भनक लगते ही आसपास मौजूद कई बंदर वहां पहुंच गए और उसे बाहर निकालने की कोशिश करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लंबे समय तक बंदरों का झुंड पाइप के आसपास मंडराता रहा।
बच्चे की हुई मौत
कई बंदर बार-बार पाइप को खींचने और बच्चे तक पहुंचने का प्रयास करते रहे। मगर उनकी तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। घंटों तक संघर्ष करने के बाद भी जब बच्चा बाहर नहीं निकल सका तो उसकी दम घुटने और अत्यधिक थकावट के कारण मौत हो गई।
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शाम होते-होते बदल गया माहौल
घर में रहने वाले परिवार को शुरुआत में इस पूरी घटना की जानकारी नहीं थी। उन्हें तब कुछ असामान्य लगा जब शाम के समय बड़ी संख्या में बंदर घर की छत, दीवारों और आसपास के पेड़ों पर जमा होने लगे। धीरे-धीरे बंदरों की संख्या बढ़ती गई और उनका व्यवहार भी असामान्य दिखाई देने लगा।
बच्चे के पास डटे रहे बंदर
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर लगातार आवाजें निकाल रहे थे और उस स्थान के आसपास घूम रहे थे- जहां उनका बच्चा फंसा हुआ था। रात होते-होते स्थिति और गंभीर हो गई। बंदरों का झुंड घर के चारों ओर डटा रहा, जिससे परिवार के सदस्य बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पाए।
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बना रहा डर का माहौल
बंदरों की लगातार चीख-पुकार और आक्रोशपूर्ण गतिविधियों के कारण पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया। परिवार ने सुरक्षा के मद्देनजर घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखीं। बच्चों और बुजुर्गों में भी भय का माहौल रहा। बंदरों के आक्रामक व्यवहार को देखते हुए आसपास के लोगों ने भी दूरी बनाए रखी।
घर में फंसा रहा परिवार
रातभर बंदरों का झुंड उसी स्थान की निगरानी करता रहा। इस दौरान किसी ने भी उस स्थान के नजदीक जाने की हिम्मत नहीं की। अगले दिन भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। बंदरों का झुंड और अधिक आक्रामक दिखाई देने लगा।
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मौके से नहीं हटे बंदर
लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के कर्मचारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो पाया कि बंदरों का पूरा झुंड उसी जगह के आसपास मौजूद था- जहां बंदर के बच्चे का शव पाइप में फंसा हुआ था। टीम ने पहले बंदरों को वहां से हटाने के लिए ध्वनि आधारित उपाय और पटाखों का इस्तेमाल किया, लेकिन बंदरों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया।
एक घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया शव
वन विभाग की टीम को बेहद सावधानी के साथ कार्रवाई करनी पड़ी। करीब एक घंटे तक प्रयास करने के बाद कर्मचारी छत तक पहुंचने में सफल हुए और पाइप में फंसे बंदर के बच्चे के शव को बाहर निकाला।
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कैसे हटे बंदर?
शव हटाने के बाद कुछ समय तक बंदर उसी क्षेत्र में मौजूद रहे, लेकिन धीरे-धीरे उनका झुंड वहां से हटने लगा। शाम तक अधिकांश बंदर क्षेत्र छोड़कर चले गए और इलाके में सामान्य स्थिति बहाल हो गई। इसके बाद परिवार ने भी राहत की सांस ली और करीब एक दिन बाद घर से बाहर निकल पाया।
लोगों में चर्चा का विषय बनी घटना
यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। कई स्थानीय लोगों का मानना है कि बंदरों ने अपने बच्चे के प्रति असाधारण लगाव और संवेदनशीलता दिखाई। वहीं वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बंदर सामाजिक समूहों में रहने वाले जीव हैं और अपने समूह के सदस्यों, विशेषकर बच्चों के प्रति सुरक्षात्मक व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।
