शिमला। हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक आपदाओं से मिले गहरे जख्मों पर एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार ने मरहम लगाया है। देवभूमि की पुकार सुनते हुए केंद्र सरकार ने आपदा में राज्य के क्षतिग्रस्त सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है।
पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेस्मेंट के तहत केंद्र से 49 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी होते हीए प्रदेश के शिक्षा विभाग ने आपदा से टूटे स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण और मरम्मत की कवायद को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। इस वित्तीय सहायता से राज्यभर के 1678 से अधिक प्रभावित स्कूल भवनों की मरम्मतए सुदृढ़ीकरण और पुनर्निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
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केंद्र की इस भारी.भरकम सहायता से अब हिमाचल के उन हजारों नौनिहालों के चेहरों पर मुस्कान लौटेगीए जो पिछले काफी समय से अस्थायी टेंटों या वैकल्पिक व्यवस्थाओं में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे।
आपदा के जख्म भरने में फिर आगे आई केंद्र सरकार
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं ने सड़क, पुल और सरकारी भवनों के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को भी गहरा नुकसान पहुंचाया था। अनेक स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई। ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई यह पहली किस्त प्रदेश के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने भी माना है कि केंद्र की इस सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल भवनों को फिर से खड़ा करने और शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य बनाने में तेजी आएगी।
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1678 स्कूल भवनों की बदलेगी तस्वीर
केंद्र से प्राप्त राशि के आधार पर प्रदेश के 1678 क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों में मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू किए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हिमुडा) को जिम्मेदारी सौंपी है। निर्देश दिए गए हैं कि जिन स्कूलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू किए जाएं ताकि बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित भवनों में शिक्षा मिल सके।
विद्यार्थियों को मिलेगी राहत
प्राकृतिक आपदाओं के बाद कई स्कूलों में कक्षाएं अस्थायी कमरों, सामुदायिक भवनों या वैकल्पिक व्यवस्थाओं में संचालित की जा रही थीं। भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के बाद हजारों विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाओं के साथ नियमित शैक्षणिक माहौल मिलेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण और समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी।
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आपदा ने शिक्षा ढांचे को पहुंचाया था भारी नुकसान
प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 559 शिक्षण संस्थान प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए थे, जिनमें 31 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन किया गया था। इससे पहले वर्ष 2023 में आई भीषण आपदाओं के दौरान 1209 स्कूल भवन प्रभावित हुए थे, जिनकी मरम्मत के लिए 46 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। लगातार आपदाओं से प्रभावित शिक्षा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए अब दीर्घकालिक योजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
छात्र संख्या के अनुसार बनेंगे नए स्कूल भवन
प्रदेश सरकार ने भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल भवन निर्माण नीति में बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब नए भवनों का निर्माण छात्र संख्या और स्थानीय जरूरतों के आधार पर किया जाएगा। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और स्कूलों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित किया जा सकेगा।
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सुरक्षा मानकों पर रहेगा विशेष फोकस
प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए स्कूल भवन निर्माण के नियमों को और अधिक सख्त किया जा रहा है। भूमि चयन से लेकर निर्माण कार्य तक की जवाबदेही संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। सरकार पहले ही यह निर्णय ले चुकी है कि नदी-नालों से 100 मीटर के दायरे में सरकारी भवनों का निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण से पहले भू-वैज्ञानिक और तकनीकी जांच को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
केंद्र की मदद से मजबूत होगा हिमाचल का शैक्षणिक भविष्य
केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई यह पहली किस्त केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि हिमाचल के लाखों विद्यार्थियों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रदेश के दूरदराज और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्थित स्कूलों की तस्वीर बदलने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
