शिमला। देश सहित हिमाचल की आर्थिक नीतियों और विकास की दिशा तय करने वाला आम बजट 2026 अब बस एक कदम दूर है। केंद्र की मोदी सरकार 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले इस बजट में हिमाचल को क्या मिलता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं कई बार वित मंत्री से मुलाकात कर हिमाचल के मुद्दों को उठा चुके हैं। सीएम सुक्खू ने चार मुख्य मुद्दों को केंद्र के समक्ष उठाया है, जिसमें राजस्व घाटा अनुदानए लोन लिमिटए ग्रीन फंड और आपदा राहत जैसे मामले शामिल हैं।
बजट पिटारे से हिमाचल को क्या मिलेगा?
हिमाचल प्रदेश लंबे समय से वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। आपदाओं से हुए नुकसान, सीमित संसाधन और बढ़ते खर्च के बीच राज्य की नजर अब केंद्र के बजट पिटारे पर टिकी है। खासतौर पर इसलिए भी क्योंकि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। ऐसे में आम बजट 2026 ही वह मंच है, जहां से हिमाचल को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
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बजट से पहले दिल्ली में एक्टिव हुए सीएम सुक्खू
बजट से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर हिमाचल से जुड़े अहम मुद्दे सीधे केंद्र के सामने रखे। सीएम ने साफ कहा कि पहाड़ी राज्य होने के नाते हिमाचल की जरूरतें मैदानी राज्यों से अलग हैं और बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान जरूरी हैं।
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केंद्र के सामने रखीं चार बड़ी मांगें
मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार के समक्ष चार मुख्य मांगें रखीं, जिन पर हिमाचल की आर्थिक सेहत काफी हद तक निर्भर करती है—
- राजस्व घाटा अनुदान में बढ़ोतरी
सीएम ने मांग की कि हिमाचल को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये सालाना का राजस्व घाटा अनुदान दिया जाए, ताकि राज्य पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम किया जा सके। - पहाड़ी राज्यों के लिए अलग ग्रीन फंड
हिमालयी राज्यों की पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को देखते हुए सीएम ने 50,000 करोड़ रुपये सालाना का ग्रीन फंड बनाने की मांग की, जिससे हरित विकास, जंगल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन से जुड़े कार्यों को गति मिल सके। - आपदा राहत के लिए विशेष प्रावधान
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। सीएम ने बजट में डिजास्टर रिस्क इंडेक्स को अलग से परिभाषित करने और आपदा प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधन देने की मांग रखी। - लोन लिमिट में छूट की मांग
राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का अतिरिक्त 2 प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति देने का आग्रह किया, ताकि विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे के कार्यों को रफ्तार मिल सके।
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हिमाचल की उम्मीदें, केंद्र का फैसला
अब सबकी नजरें 1 फरवरी पर टिकी हैं। क्या केंद्र सरकार बजट में हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए अलग व्यवस्था करेगी? क्या राजस्व घाटा, ग्रीन फंड और आपदा राहत पर राज्य को राहत मिलेगी? इन सवालों के जवाब आम बजट 2026 के साथ सामने आएंगे। फिलहाल हिमाचल को उम्मीद है कि इस बार बजट में उसकी मुश्किलों को समझते हुए केंद्र कुछ ठोस फैसले जरूर करेगा।
