चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मौसम बिगड़ने के बाद मणिमहेश यात्रा को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। भरमौर प्रशासन ने खराब मौसम को देखते हुए यात्रा को फिलहाल अस्थायी तौर पर रोक दिया है। भरमौर और आसपास के निचले क्षेत्रों में बारिश हो रही है, जबकि ऊंची पहाड़ियों पर हल्का हिमपात दर्ज किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया है।
मणिमहेश यात्रा पर अस्थायी रोक
एडीएम भरमौर विकास शर्मा ने यात्रा पर अस्थायी रोक की पुष्टि की है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति सामान्य होने के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद यात्रा दोबारा शुरू करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
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बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी
गुरुवार सुबह से भरमौर के निचले इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। वहीं मणिमहेश और गौरीकुंड की तरफ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी भी हुई है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बदलते मौसम को देखते हुए यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को फिलहाल रोकना जरूरी समझा गया।
सुरक्षित जगहों पर रुकने की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अभी मणिमहेश की तरफ आगे न बढ़ें और जहां हैं, वहीं सुरक्षित स्थानों पर रुकें। साथ ही यात्रियों से प्रशासन के अगले आदेश का इंतजार करने को कहा गया है।
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कल से शुरू होना है बड़ा शाही स्नान
मणिमहेश यात्रा के बीच अब सबसे बड़ा सवाल 18 सितंबर से होने वाले बड़े शाही स्नान को लेकर है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बड़ा शाही स्नान 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे शुरू होगा और 19 सितंबर शाम 3:28 बजे तक चलेगा।
शाही स्नान करने पहुंचे कई श्रद्धालु
इस शाही स्नान के लिए हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भरमौर पहुंच चुके हैं। हजारों श्रद्धालु मणिमहेश की डल झील में आस्था की डुबकी लगाने की तैयारी में हैं। हालांकि, अब शाही स्नान भी मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। प्रशासन मौसम और यात्रा मार्ग की परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही आगे का फैसला लेगा।
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पिछले साल ट्रैक पर फंस गए थे हजारों श्रद्धालु
मणिमहेश यात्रा के दौरान खराब मौसम पहले भी बड़ी चुनौती बन चुका है। पिछले साल भारी बारिश के चलते 25 हजार से अधिक श्रद्धालु मणिमहेश के ट्रैक पर फंस गए थे। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा था और श्रद्धालुओं को बाहर निकालने में करीब एक सप्ताह का समय लगा था।
प्रशासन ने बरती सतर्कता
इसी अनुभव को देखते हुए इस बार भी प्रशासन मौसम को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। फिलहाल श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर रुकने और बिना प्रशासन की अनुमति के यात्रा आगे जारी न रखने की सलाह दी गई है।
