मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सेरी मंच पर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर लगी प्रदर्शनी में इस बार एक ऐसी शॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है- जिसकी कीमत सुनकर हर कोई हैरान है। कारीगर नरेश कुमार ने यहां एक लाख रुपये की शॉल प्रदर्शित की है।

एक लाख की शॉल

खास बात यह है कि इस शॉल पर सामान्य डिजाइन नहीं, बल्कि महाभारत काल के चक्रव्यूह की बारीक संरचना को बुना गया है। नरेश कुमार की कारीगरी का एक और नमूना 30 हजार रुपये का मफलर है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल के 9 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट : नदी-नालों से रहें दूर, जानें मौसम अपडेट

इससे पहले 3 लाख की बनाई थी शॉल

प्रदर्शनी में आने वाले लोग इन दोनों उत्पादों को खास तौर पर देखने पहुंच रहे हैं। मंडी में कीमत के लिहाज से यह शॉल दूसरी सबसे महंगी बताई जा रही है। इससे पहले करीब चार वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में तीन लाख रुपये की शॉल प्रदर्शित की गई थी।

छह से सात महीने में तैयार होती है एक शॉल

नरेश कुमार की इस खास शॉल को तैयार करना कोई सामान्य काम नहीं है। इसे हाथ से बुनने में लगभग छह से सात महीने का समय लग जाता है। शॉल के लिए खरगोश की ऊन का इस्तेमाल किया गया है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला : तलाक के बाद भी हर महीने पति से पैसे ले सकते है पत्नी...

कैसी है शॉल की डिजाइन?

इसमें महाभारत के चक्रव्यूह के साथ कई पारंपरिक आकृतियों को भी जगह दी गई है। डिजाइन में रानी के नौलखे हार की शैली, टका आकृति और मोर पंचा जैसे पारंपरिक पैटर्न शामिल हैं। यही बारीक कारीगरी इसे आम शॉल से अलग बनाती है।

किन्नौर-दिल्ली तक पहुंची नरेश की कारीगरी

कारीगर के अनुसार इस तरह की बारीक डिजाइन वाली शॉल की खास मांग किन्नौर क्षेत्र में रहती है। उनकी बनाई शॉल दिल्ली तक भी भेजी जा चुकी हैं। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर लगी प्रदर्शनी में नरेश कुमार इस शॉल का केवल एक नमूना लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि इतनी मेहनत और समय से तैयार होने वाले उत्पाद को तैयार करने के पीछे पारंपरिक बुनाई की कला को आगे बढ़ाना भी उद्देश्य है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में नया चमत्कार...बकरी को 'देवी रूप' मान रहे लोग, जानें क्या है मामला

प्रदर्शनी में 8 से 10 विक्रेता और उत्पादक पहुंचे

सेरी मंच पर आयोजित प्रदर्शनी में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले हथकरघा और दूसरे उत्पाद लोगों के लिए उपलब्ध हैं। यहां करीब 8 से 10 हथकरघा कारीगर और स्थानीय उत्पादक-विक्रेता अपने सामान के साथ पहुंचे हैं।

 

प्रदर्शनी का आयोजन राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर किया गया है और यह 11 अगस्त तक चलेगी। इससे स्थानीय कारीगरों को अपने हाथ से तैयार किए गए उत्पाद लोगों तक पहुंचाने का मंच मिल रहा है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : मायके गई थी आशा, पंजाब में ट्रेन की चपेट में आई- शाम को लौटना था घर

अब तक कई उत्पाद बेच चुके हैं

नरेश कुमार की कारीगरी को प्रदर्शनी में पहले भी अच्छा प्रतिसाद मिला है। उनके अनुसार यहां 20 हजार रुपये की एक शॉल, करीब 18 हजार रुपये का स्टोल और अन्य पारंपरिक पट्टियां भी बिक चुकी हैं। नरेश कुमार को राज्य स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है। अर्की में उनका 'तमन्ना ट्रेनिंग एंड सेल सेंटर' नाम से छोटा उद्योग है, जहां हथकरघा से जुड़े काम को आगे बढ़ाया जा रहा है।

PM मोदी को भी पहनाई जा चुकी है शॉल

नरेश कुमार की कारीगरी को एक समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचने का मौका मिला। उनके अनुसार करीब पांच-छह साल पहले जब प्रधानमंत्री मोदी मंडी आए थे, तब उन्हें जो शॉल पहनाई गई थी, वह भी इसी तरह की कारीगरी से तैयार की गई थी।

 

नरेश कुमार के मुताबिक उस समय उस शॉल की कीमत करीब 35 हजार रुपये थी। समय के साथ उसी तरह की शॉल की कीमत अब बढ़कर करीब 60 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : पहाड़ी से गिरा मलबा, चपेट में आईं कई बाइक-स्कूटी; तेज बारिश में स्कूल-कॉलेज बंद

प्रदर्शनी में लाइव दिखाई जा रही हथकरघा कारीगरी

नरेश कुमार सिर्फ तैयार उत्पाद लेकर ही प्रदर्शनी में नहीं बैठे हैं, बल्कि लोगों को यह भी दिखा रहे हैं कि हथकरघा पर पट्टी किस तरह तैयार की जाती है। इसके लिए वह अपने साथ एक छोटी खड्डी लेकर आए हैं।

करीब से बुनाई देखने का मौका

शॉल और टोपियों के किनारों पर इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक पट्टियां इसी छोटी खड्डी पर तैयार की जा रही हैं। प्रदर्शनी में आने वाले लोग बुनाई की इस प्रक्रिया को करीब से देखने के लिए रुक रहे हैं।

यह भी पढ़ें : शिमला ZP अध्यक्ष चुनाव बना रोचक : CM सुक्खू और जयराम आमने-सामने, किसके पास बहुमत?

लोगों की उमड़ रही भीड़

नरेश कुमार ने बताया कि प्रदर्शनी के दौरान उनकी बनाई कई पट्टियां भी लोग खरीद चुके हैं। इस तरह से सेरी मंच पर लगी प्रदर्शनी न केवल तैयार हथकरघा उत्पादों की बिक्री का माध्यम बनी है, बल्कि लोगों को पारंपरिक बुनाई की बारीकियों को करीब से देखने का अवसर भी दे रही है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें