शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुक्खू सरकार का बड़ा प्रयोग अब असर दिखाने लगा है। शुरुआती विरोध और सियासी बहस के बीच शुरू किए गए 151 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न को लोगों ने अब अपनाना शुरू कर दिया है। नतीजा यह है कि इन स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया है और बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला इन संस्थानों में करवाने पहुंच रहे हैं।
विरोध के बीच शुरू हुई व्यवस्था अब बनी पसंद
सुक्खू सरकार ने जब 151 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न लागू करने का फैसला लिया था] तब प्रदेश के कई हिस्सों में इसका तीखा विरोध हुआ था। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपी बोर्ड) में ही पढ़ाने की मांग की थी। बावजूद इसके सरकार अपने फैसले पर कायम रही और अब वही योजना धीरे-धीरे लोगों की पसंद बनती नजर आ रही है।
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एडमिशन में जबरदस्त उछाल
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इन सीबीएसई पैटर्न वाले स्कूलों में छात्रों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। चंबा के किलाड़ और मंडी के जंजैहली जैसे स्कूलों में तो दाखिले लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा किन्नौर, शिमला, सिरमौर और लाहौल-स्पीति के कई स्कूलों में भी 20 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिली है, जो इस नई व्यवस्था की स्वीकार्यता को दर्शाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ी दिलचस्पी
खास बात यह है कि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी इस बदलाव का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। पहले जहां सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या घटती जा रही थी, वहीं अब इन सीबीएसई स्कूलों में अभिभावकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। इसे सरकार की शिक्षा नीति के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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तीनों संकाय शुरू करने के निर्देश
छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन सभी 151 स्कूलों में मेडिकल, नॉन-मेडिकल और कॉमर्स तीनों संकाय शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग को तय समयसीमा के भीतर आवश्यक संसाधन और स्टाफ उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि छात्रों को बेहतर विकल्प और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
शिक्षा सुधार के दावे और उपलब्धियां
मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, जिनका असर अब दिखने लगा है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देश में तेजी से आगे बढ़ा है और गुणवत्ता के मामले में राज्य की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। साथ ही प्रदेश ने पूर्ण साक्षरता की दिशा में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
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सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर
सीबीएसई पैटर्न को लेकर पहले जहां विरोध और असंतोष था, वहीं अब बढ़ते दाखिलों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू होगा और क्या इससे सरकारी स्कूलों की छवि पूरी तरह बदल जाएगी—यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल, सुक्खू सरकार का यह प्रयोग शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
