शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को हिमकेयर योजना के तहत लंबित भुगतान को लेकर हाईकोर्ट से सख्त निर्देश मिले हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि फंड की कमी का हवाला देकर पात्र मरीजों के इलाज का पैसा नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को हिमकेयर फंड जल्द जारी करने के लिए हरसंभव कदम उठाने के आदेश दिए हैं।

फंड की कमी का बहाना नहीं चलेगा, हाईकोर्ट

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई मरीज हिमकेयर योजना का पात्र है, तो सिर्फ यह कहकर उसका इलाज का पैसा नहीं रोका जा सकता कि सरकार के पास बजट या फंड नहीं है।

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अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मंगलवार तक मरीज के बकाया पैसे जारी करने की पूरी कोशिश की जाए। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार खुद इस योजना के तहत इलाज का भरोसा देती है और विभाग भी दावा सही मान चुका है, तो फंड की कमी का बहाना नहीं बनाया जा सकता।

अपनी जेब से देने पड़े 2.70 लाख रुपये

यह मामला सुरेंद्र कुमार नाम के मरीज का है, जो हिमकेयर योजना के लाभार्थी हैं। दिल की बीमारी के कारण उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती होना पड़ा, जहां उनके दिल में कोरोनरी स्टेंट डाले गए। इलाज पर करीब 2.70 लाख रुपये खर्च हुए। हिमकेयर कार्ड होने के बावजूद अस्पताल को सरकार से समय पर भुगतान नहीं मिला, इसलिए पूरी रकम सुरेंद्र कुमार को अपनी जेब से चुकानी पड़ी।

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सरकार ने माना दावा सही, लेकिन फंड न होने की बात कही

जब कई बार पैसे वापस नहीं मिले तो सुरेंद्र कुमार ने 12 दिसंबर 2025 को एचपी स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी के सीईओ को कानूनी नोटिस भेजा। इसके जवाब में 2 फरवरी 2026 को विभाग ने माना कि 2.70 लाख रुपये का दावा पूरी तरह सही है। लेकिन विभाग ने यह भी कहा कि हिमकेयर योजना में फिलहाल फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान नहीं किया जा सका। इसी पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए सरकार को भुगतान करने के निर्देश दिए।

अवमानना मामले में बड़े अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. राकेश शर्मा और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. गोपाल बेरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि अदालत के आदेशों की अनदेखी करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

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नर्सिंग कॉलेज की एनओसी नहीं देने पर बढ़ी मुश्किल

यह मामला शहीद दीवान चंद कटोच एजुकेशन सोसायटी से जुड़ा है। संस्था ने नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए एनओसी मांगी थी। हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2025 को अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से कोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

सेवा विस्तार मामले में सरकार ने हलफनामा किया दाखिल

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नौकरी देने के मामले में भी सरकार ने हाईकोर्ट में अनुपालन हलफनामा दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 22 जुलाई तय की है। साथ ही पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से फिलहाल छूट दे दी गई है।

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2017 के आदेशों के उल्लंघन का आरोप

यह मामला 2017 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा। आरोप है कि सरकार ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए कई रिटायर्ड कर्मचारियों को दोबारा सेवा में रखा, जो कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

कोर्ट ने मांगी पूरी सूची

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि 19 दिसंबर 2017 से लेकर 2026 तक जिन-जिन रिटायर्ड कर्मचारियों को सेवा विस्तार या दोबारा नौकरी दी गई है, उनकी पूरी सूची और सभी जरूरी जानकारी अदालत के सामने पेश की जाए। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रही है और नियमों के पालन में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।