शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब बरसात के दिनों में उफान में बहने वाली नदियां पुलों को नहीं बहा पाएंगी। राज्य में मानसून के दौरान हर साल तबाही मचाने वाली नदियों के विकराल रूप से पुलों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। हिमाचल के मंत्री विक्रमादित्य सिंह का लोक निर्माण विभाग ;च्ॅक्द्ध अब बाढ़ और नदियों के बढ़ते जलस्तर में बहने वाले पुलों को बचाने के लिए नई तकनीक अपनाने वाला है।
ऊंचे होंगे हिमाचल की नदियों पर बने पुराने पुल
विक्रमादित्य सिंह के विभाग ने पुराने पुलों को बहने से बचाने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विभाग पुराने पुलों को नई तकनीक के साथ ऊंचा करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत शिमला जिले के सुन्नी क्षेत्र से की गई है। सुन्नी में सतलुज नदी पर बने पुराने पुल को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के जरिए लगभग 20 मीटर तक ऊंचा उठाया जा रहा है। इस मेकओवर और अपग्रेडेशन कार्य पर करीब 10 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पुल ऊंचा होने से जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद पानी और मलबे का बहाव बिना किसी रुकावट के नीचे से निकल जाएगा।
यह भी पढ़ें : आय से अधिक संपत्ति मामले में बीजेपी MLA सुधीर शर्मा पर FIR, एक व्यक्ति और 300 भूमि रजिस्ट्रियां....
बता दें कि प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मानसून में कई पुल तेज बहाव, मलबे और चट्टानों की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन घटनाओं से यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण विभाग ने अब पुल निर्माण और संरक्षण की रणनीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है।
ब्यास और रावी समेत सभी प्रमुख नदियों का तकनीकी सर्वे
लोक निर्माण विभाग केवल सुन्नी पुल तक सीमित नहीं रहेगा। अब सतलुज, ब्यास, रावी और अन्य प्रमुख नदियों पर बने पुराने पुलों का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा। जिन पुलों को भविष्य में बाढ़ का अधिक खतरा माना जाएगा, उन्हें चरणबद्ध तरीके से ऊंचा किया जाएगा या आवश्यकता पड़ने पर नए इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार उनका पुनर्निर्माण किया जाएगा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: माता-पिता को बेसहारा छोड़ गया 24 साल का बेटा, नशे की ओवरडोज मानी जा रही वजह
क्या कहते हैं मंत्री विक्रमादित्य सिंह
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्रदेश में अत्यधिक वर्षा और अचानक आने वाली बाढ़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में वर्षों पहले बने पुल वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इसलिए विभाग अब ऐसी तकनीक अपना रहा है जिससे भविष्य में पुल अधिक मजबूत, टिकाऊ और बाढ़ के अनुकूल बन सकें।
यह भी पढ़ें : हिमाचल पुलिस ने तोड़ा अंतर्राज्यीय नशा नेटवर्क, अमृतसर से दबोचा मुख्य सप्लायर; पि***स्टल भी मिली
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल पुलों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि मानसून के दौरान सड़क संपर्क भी लंबे समय तक बाधित नहीं होगा। इससे आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आम लोगों और वाहनों की आवाजाही भी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुचारु बनी रहेगी। प्रदेश में बदलते मौसम के बीच यह योजना भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में हिमाचल के कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी इसी तकनीक के आधार पर पुलों को मजबूत और ऊंचा किया जाएगा।
