शिमला देवभूमि हिमाचल के मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था का आंकड़ा भी करोड़ों में पहुंच रहा है। प्रदेश के 36 सरकारीकृत मंदिरों में पिछले तीन वर्षों के दौरान श्रद्धालुओं ने 419.88 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा अर्पित किया है। सबसे ज्यादा दान हमीरपुर के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध को मिला है।
विधानसभा में पेश हुए आंकड़े
विधानसभा में शाहपुर विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024, 2025 और 2026 में एक अगस्त तक मंदिरों को कुल 4,19,88,37,451 रुपये की राशि चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई।
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तीन साल से हर साल बढ़ता गया चढ़ावा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में श्रद्धालुओं ने 153.32 करोड़ रुपये मंदिरों में चढ़ाए थे। वर्ष 2025 में यह राशि बढ़कर 157.51 करोड़ रुपये हो गई। वहीं 2026 में सिर्फ एक अगस्त तक ही 109.04 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हो चुका है। यानी प्रदेश के सरकारीकृत मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था से आने वाली राशि लगातार बड़े स्तर पर बनी हुई है।
बाबा बालक नाथ के दरबार में सबसे ज्यादा चढ़ावा
चढ़ावे के मामले में दियोटसिद्ध स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर सबसे आगे रहा। पिछले तीन वर्षों में यहां 99.19 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके बाद बिलासपुर का मां नयना देवी मंदिर दूसरे स्थान पर रहा, जहां 86.94 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया। वहीं ज्वालामुखी मंदिर में 36.57 करोड़ रुपये की राशि श्रद्धालुओं ने अर्पित की।
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इन मंदिरों में भी करोड़ों का चढ़ावा
अन्य प्रमुख मंदिरों की बात करें तो त्रिलोकपुर के महामाया बाला सुंदरी मंदिर को 26.99 करोड़, कांगड़ा के बज्रेश्वरी देवी मंदिर को 13.76 करोड़, चामुंडा नंदिकेश्वर मंदिर एवं आदि हिमानी समूह को 11.68 करोड़ और शिमला के जाखू हनुमान मंदिर को 8.82 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला।
मंदिरों के विकास से लेकर गौवंश संरक्षण तक खर्च
सरकार के मुताबिक मंदिरों से मिलने वाली इस आय का इस्तेमाल तय कानूनी प्रावधानों के तहत किया जाता है। इसमें मंदिरों और धार्मिक स्थलों का रखरखाव, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं, पेयजल, बिजली, सुरक्षा, सफाई, शौचालय, पार्किंग और स्ट्रीट लाइट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
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कहां-कहां खर्च होता है पैसा?
इसके अलावा लंगर, धार्मिक आयोजन, मेले, गौशालाओं और शिक्षण संस्थानों से जुड़े कार्यों पर भी मंदिरों की आय खर्च की जाती है। सरकार ने यह भी बताया कि मंदिरों की आय का 15 प्रतिशत हिस्सा गौसदनों के निर्माण, रखरखाव और गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
आपदा राहत में नहीं लगाया जा सकता मंदिरों का चढ़ावा
विधानसभा में सरकार ने एक अहम बात यह भी स्पष्ट की कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारी नुकसान होने के बावजूद मंदिरों में आने वाली चढ़ावे की राशि को सीधे आपदा राहत कार्यों में खर्च करने का मौजूदा नियमों में प्रावधान नहीं है।
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सरकार के अनुसार वर्तमान कानूनी व्यवस्था मंदिरों की आय को आपदा राहत में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देती। फिलहाल इसमें कोई नया प्रावधान लाने पर भी विचार नहीं किया जा रहा है।
