मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने लड़की को धोखे में रखकर उससे दूसरी शादी रचा ली। युवक पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसने यह बात युवती से छिपाई और उसे अंधेरे में रखकर उससे दूसरी शादी रचा ली। शादी के बाद सच सामने आने पर न केवल युवती को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उसे बेरहमी से पीटकर घर से बाहर भी निकाल दिया गया। न्याय की आस में दर.दर भटकने के बाद आखिरकार पीड़िता को अदालत से राहत मिली है।
धोखे में रख युवती से रचाई दूसरी शादी
मामले की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई, जब बद्दी (सोलन) की काजल सकलानी का विवाह संजीव कुमार के साथ बड़े ही अरमानों के साथ संपन्न हुआ। काजल को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस शख्स के साथ वह सात फेरे ले रही है, वह पहले से ही शादीशुदा है। संजीव ने अपनी पहली शादी की बात पूरी तरह छिपाकर काजल को धोखे में रखा। कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन धीरे.धीरे सच्चाई सामने आने लगी, जिससे युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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शादी के बाद शुरू हुई प्रताड़ना
शादी के कुछ समय बाद ही संजीव और उसके परिवार का असली चेहरा सामने आने लगा। सच्चाई उजागर होने के बाद पति और उसके परिवार का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। काजल ने अदालत को बताया कि जब उसने सच जानना चाहा, तो पति, ससुर और ननद ने मिलकर उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब 7 नवंबर 2024 को इन सभी ने मिलकर काजल की बेरहमी से पिटाई की और उसे बेसहारा हालत में घर से बाहर निकाल दिया। तब से पीड़िता अपने मायके गांव कोहल (तहसील बल्ह) में रहने को मजबूर है।
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कोर्ट की शरण में पहुंची पीड़िता
ससुराल की प्रताड़ना से परेशान होकर युवती कोर्ट की शरण में पहुंची। युवती ने कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई और बताया कि उसके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है, जबकि उसका पति एक बड़ा ट्रांसपोर्टर है, जिसके पास दर्जनों बसें और करोड़ों की संपत्ति है। इसके बावजूद उसे बेसहारा छोड़ दिया गया, जिससे उसकी स्थिति बेहद दयनीय हो गई।
कोर्ट में पेश नहीं हुआ आरोपी पति
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पति अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते न्यायालय ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में आरोपी का अनुपस्थित रहना उसके पक्ष को कमजोर करता है। प्रधान न्यायाधीश (पारिवारिक न्यायालय) मंडी ने साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर पाया कि पति ने अपनी पहली शादी छिपाकर युवती के साथ धोखा किया और उसके साथ क्रूरता भी की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में आरोपी गुजारा भत्ता देने से बच नहीं सकता।
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हर माह 25 हजार रुपये देने का आदेश
अदालत ने यह मानते हुए कि पति की आर्थिक स्थिति मजबूत है, उसकी आय का अनुमान 50 से 75 हजार रुपये मासिक के बीच लगाया। इसके आधार पर न्यायालय ने आदेश दिया कि संजीव कुमार अपनी पत्नी काजल सकलानी को याचिका दायर करने की तिथि से हर माह 25,000 रुपये गुजारा भत्ता अदा करेगा।
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न्याय से मिली राहत
हालांकि अदालत के फैसले से पीड़िता को आर्थिक राहत मिली है, लेकिन उसके साथ हुआ धोखा और अत्याचार एक गहरी पीड़ा छोड़ गया है। यह मामला समाज में भरोसे और रिश्तों की सच्चाई पर भी सवाल खड़ा करता हैए साथ ही यह संदेश देता है कि कानून ऐसे मामलों में पीड़ितों के साथ खड़ा है।
