शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी और पहाड़ों की रानी कहलाने वाली शिमला इन दिनों कचरे के संकट से जूझ रही है। सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने के कारण शहर के कई हिस्सों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। सैहब सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को लगातार छठे दिन भी जारी रही, जिससे हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं। शहर की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा हो रहा कचरा अब स्थानीय लोगों के साथ.साथ पर्यटकों के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है। जिसके चलते अब नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 40 कर्मचारियों पर कार्रवाई की है।

निगम का बड़ा एक्शन, 40 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त

हड़ताल के बीच नगर निगम शिमला ने बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 40 सफाई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। बताया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं को प्रभावित होने से रोकने के लिए प्रशासन पहले ही आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून लागू कर चुका है। इसके बावजूद कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, जिसके बाद निगम प्रशासन ने यह सख्त कार्रवाई की है। इस फैसले को हड़ताल पर डटे कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

 

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शहर में जगह-जगह कूड़े के अंबार

सफाई कर्मियों के काम पर न लौटने के कारण कई दिनों से घर-घर कचरा संग्रहण बंद पड़ा है। नतीजतन शहर के विभिन्न इलाकों में कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई स्थानों पर बदबू फैलने लगी है और आवारा पशु कूड़े में भोजन तलाशते नजर आ रहे हैं। इससे लोगों को आने-जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पर्यटकों पर भी पड़ रहा असर

गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक शिमला पहुंच रहे हैं, लेकिन शहर की बिगड़ी सफाई व्यवस्था उनकी नजरों से भी नहीं बच पा रही। पर्यटन नगरी की पहचान स्वच्छ और खूबसूरत वातावरण के रूप में रही है, लेकिन मौजूदा हालात शहर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन

हड़ताल पर बैठे कर्मचारी अपने मानदेय में वार्षिक बढ़ोतरी बहाल करने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में मिलने वाली सुविधाओं और वेतन वृद्धि से जुड़े प्रावधानों को बहाल किया जाए। इसी मांग को लेकर वे पिछले कई दिनों से काम बंद कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान

बताया जा रहा है कि कर्मचारियों और नगर निगम प्रशासन के बीच बातचीत का दौर भी चला था। प्रारंभिक स्तर पर समाधान की उम्मीद जगी थी, लेकिन कर्मचारियों को लिखित आश्वासन नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। इसी वजह से हड़ताल समाप्त होने की संभावना फिलहाल टल गई है और कर्मचारी आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

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कई संगठनों का मिला समर्थन

सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को विभिन्न कर्मचारी और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। इससे आंदोलन को और मजबूती मिली है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करना उसकी प्राथमिकता है और इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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शहरवासियों की बढ़ी चिंता

लगातार बढ़ते कूड़े के ढेर और लंबी खिंचती हड़ताल ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सफाई व्यवस्था से जुड़ी समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन और कर्मचारियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं, जिससे इस गतिरोध का कोई रास्ता निकल सके।

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