मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की हेमलता पठानिया खुद दिव्यांग हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि एक दिव्यांग दूसरे दिव्यांगों की मदद भी कर सकता है। अगर आप ये नहीं सोच पा रहे तो कोई बात नहीं पर ये हकीकत है। दिव्यांग हेमलता दूसरे दिव्यांगों के हक की लड़ाई लड़ रहीं हैं।

सरकारी योजना से जोड़ना

साल 2004 में हेमलता हिमालयन दिव्यांग कल्याण समिति से अध्यक्ष के रूप में जुड़ी थीं। ये समिति हर प्रकार से दिव्यांगों की मदद करती है। दिव्यांग हेमलता उन दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करती हैं जिन्हें इसकी जानकारी नहीं होती। 

बेबाकी से रखती हैं बात

हेमलता दिव्यांगों के हक और सुविधाओं के लिए बेबाकी से सरकार से बात करती हैं। वो किसी योद्धा से कम नहीं हैं जो सिर्फ अपने दिव्यांग साथियों के हक की बात नहीं करतीं बल्कि उन्हें आगे भी बढ़ा रही हैं।

दुर्व्यवहार पर उठाएं आवाज

हेमलता कहती हैं कि कई बार सामान्य लोग दिव्यांगजनों से गलत व्यवहार करते हैं। ये एक गंभीर समस्या है। हेमलता कहती हैं कि जब भी आप किसी दिव्यांग के साथ दुर्व्यवहार होता देखें तो इसके खिलाफ आवाज उठाएं और उस दिव्यांग की मदद कर उसे सही गाइडेंस दें।

दिव्यांग फ्रेंडली हों कार्यालय

हेमलता के मुताबिक मंडी में कई ऐसे कार्यालय हैं जहां डिसएब्ल्ड एक्ट लागू नहीं हुआ है। ऐसे में इन कार्यालयों में ना तो लिफ्ट है, ना रैंप। ऐसे में पठानिया प्रशासन से इन कार्यालयों को दिव्यांग फ्रेंडली बनाने की अपील करती हैं।

प्रेरणा है हेमलता पठानिया

हेमलता का हौसलां उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। उनकी ये कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो जिंदगी में हार मान चुके हैं। हमें हेमलता से सीखना चाहिए कि आपकी कोई भी कमजोरी आपके रास्ते में नहीं आ सकती है। ऐसा कुछ नहीं है जो आपके अच्छे इरादों को रोक सके।