शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब अपनी धरती के इतिहास, संस्कृति और लोक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार ने कक्षा छठी से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। नए पाठ्यक्रम में हिमाचल के इतिहास के साथ यहां की बोलियों, पारंपरिक खान-पान, लोक संस्कृति, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक विकास और वीरता की गाथाओं को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
अपनी जड़ों से जुड़ेंगे स्कूली छात्र
सरकार की योजना के मुताबिक संशोधित पाठ्यक्रम पर आधारित किताबें शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाने की तैयारी है। इसके लिए पाठ्यक्रम विशेषज्ञों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मदद से सामग्री तैयार करने का काम चल रहा है। अब तक विद्यार्थी इतिहास और सामाजिक विज्ञान के विभिन्न अध्यायों के जरिए देश और दुनिया से जुड़े विषय पढ़ते रहे हैं,
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लेकिन नए बदलाव के तहत हिमाचल के स्थानीय संदर्भों को भी पाठ्यक्रम में पर्याप्त जगह देने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि जब बच्चों को अपने आसपास के समाज, इतिहास, संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में स्कूल स्तर से ही जानकारी मिलेगी, तो उनमें अपने प्रदेश को समझने की जिज्ञासा बढ़ेगी। साथ ही स्थानीय विषयों से जुड़े तथ्यों को समझने से उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता को भी विकसित किया जा सकेगा।
बोलियों और पारंपरिक व्यंजनों की भी होगी पढ़ाई
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में हिमाचल के इतिहास को व्यापक रूप से शामिल करने की तैयारी है। विद्यार्थियों को प्रदेश के प्रागैतिहासिक काल से लेकर हिमाचल प्रदेश के गठन तक के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रमों से परिचित करवाया जाएगा। इतिहास को केवल तारीखों और घटनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थानीय संदर्भों और रोचक तथ्यों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने की योजना है। इससे बच्चों के लिए हिमाचल का इतिहास पढ़ना अधिक दिलचस्प और सहज बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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हिमाचल की पहचान केवल पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई किताबों में हिमाचल की विभिन्न बोलियों से संबंधित जानकारी भी शामिल करने की तैयारी है। इसके अलावा प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। इससे विद्यार्थी अपने ही प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की खान-पान संबंधी परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता से परिचित हो सकेंगे।
स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सैनिकों की गाथाएं भी पढ़ेंगे बच्चे
नई किताबों में हिमाचल के उन लोगों की कहानियों को भी स्थान देने की तैयारी है, जिन्होंने देश और प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों, कारगिल युद्ध के विजेताओं और वीर सैनिकों की गाथाओं को शामिल किया जाएगा। इन अध्यायों के जरिए विद्यार्थियों को साहस, देशभक्ति, संघर्ष और बलिदान की कहानियों से परिचित करवाने का प्रयास होगा। इसका उद्देश्य स्थानीय नायकों और वीरों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है, ताकि बच्चे अपने प्रदेश के उन लोगों के बारे में जान सकें, जिनका योगदान राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहा है।
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नए पाठ्यक्रम में केवल इतिहास और संस्कृति ही नहीं, बल्कि वर्तमान हिमाचल को समझने वाले विषयों को भी जगह दी जाएगी। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, राजनीतिक विकास और हिमाचल के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों से संबंधित विषय भी किताबों में शामिल किए जाने की तैयारी है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर निर्भर है और बदलते समय के साथ प्रदेश के सामने किस तरह की सामाजिक, आर्थिक और विकास संबंधी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
उच्चस्तरीय समिति कर रही पाठ्यक्रम तैयार
पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की समय-समय पर बैठकें हो रही हैं और नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर मंथन किया जा रहा है। इस समिति में शिक्षा सचिव के अलावा हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, एससीईआरटी के प्रतिनिधियों, सहायक प्रोफेसरों और शिक्षा विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।
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विशेषज्ञों की मदद से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों के स्तर के अनुरूप तथ्यात्मक और प्रमाणिक सामग्री तैयार हो। शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा की पुस्तकों में प्रस्तावित बदलावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में तय किए गए विषयों से जुड़ी सामग्री को अगले एक महीने के भीतर अंतिम रूप देने की तैयारी है। इसके बाद किताबों के प्रकाशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार किताबें समय पर तैयार हो सकें।
2027-28 से नई किताबों से पढ़ाई की तैयारी
सरकार का लक्ष्य है कि सभी तैयारियां पूरी करने के बाद शैक्षणिक सत्र 2027-28 से छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई करवाई जाए। सरकार का मानना है कि स्थानीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के मेल से तैयार होने वाला यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की चुनौतियों के लिए भी अधिक जागरूक बनाने में मदद कर सकता है।
