शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सरकार की ओर से 3757 पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होते ही गांव स्तर पर चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है।
1.67 लाख लोग नहीं लड़ सकेंगे पंचायती चुनाव
हालांकि, इस बार चुनाव में कई लोगों पर पाबंदियां भी लगी हैं। प्रदेश में करीब 1.67 लाख ऐसे लोग हैं, जो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इन 1.67 लोगों की चुनाव में एंट्री पर बैन लग लगा है।
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क्यों लगा है इन सभी पर बैन?
आपको बता दें कि ये 1.67 लोग वो हैं- जिन्होंने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इन लोगों ने कब्जों को नियमित करने के लिए आवेदन तो कर रखा है। मगर जब तक उन्हें NOC नहीं मिलती, तब तक वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
चुनाव लड़ने की नहीं अनुमति
राज्य निर्वाचन आयोग के पुराने प्रावधानों के अनुसार भी बिना NOC के चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अवैध कब्जों को लेकर मामला अदालतों में भी लंबित है- जिस पर अंतिम फैसले का इंतजार है।
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चिट्टा तस्करों पर भी सख्ती
इसके अलावा, राज्य सरकार ने चिट्टा तस्करी में शामिल लोगों पर भी सख्ती दिखाई है। जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं, उन्हें पंचायत चुनाव में भाग लेने से रोका गया है। इसके साथ ही सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर, रिकवरी के मामलों में फंसे लोग और सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले भी चुनावी मैदान से बाहर रहेंगे।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस बार आधे पद आरक्षित किए गए हैं, जिससे गांव की राजनीति में महिला नेतृत्व को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कई जगहों पर महिला उम्मीदवारों के साथ उनके परिजनों, खासकर पतियों की तस्वीरें भी प्रचार में दिखाई दे रही हैं- जो चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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सोशल मीडिया पर छाए दावेदार
दावेदार अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई उम्मीदवार AI की मदद से पोस्टर और बैनर तैयार कर रहे हैं और फेसबुक-व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर कर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
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तय समय पर होंगे चुनाव
CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 31 मई से पहले प्रदेशभर में पंचायत चुनाव करवाए जाएंगे। विदित रहे कि, इस बार के पंचायत चुनाव न केवल नियमों की सख्ती बल्कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के कारण भी खास नजर आ रहे हैं। गांव की सरकार चुनने की प्रक्रिया अब डिजिटल रंग में रंगती दिखाई दे रही है।
