शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिरगुल महाराज की पवित्र नगरी मानी जाने वाली चूड़धार चोटी सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में स्थित ऐसा तीर्थ है जहां श्रद्धा, साहस और प्रकृति तीनों का संगम होता है। लेकिन इसी देवस्थल तक जाने वाला रास्ता हर साल सर्दियों में मौत के मुहाने जैसा खतरनाक हो जाता है। यही कारण है कि 1 दिसंबर से प्रशासन ने चूड़धार यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया है।
बढ़ती ठंड और बर्फबारी के चलते यात्रा पर रोक
जिला शिमला की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में तापमान लगातार गिर रहा है और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी से हालात और ज्यादा खराब हो गए हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने 1 दिसंबर से अप्रैल तक यात्रा पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है।
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रास्तों पर बर्फ, शून्य से नीचे तापमान
SDM चौपाल हेमचंद वर्मा ने बताया कि हर साल सर्दियों में चूड़धार के रास्ते पर भारी बर्फ जमने से फिसलन बढ़ जाती है और तापमान बेहद कम हो जाता है। कई बार श्रद्धालु और पर्यटक बीच रास्ते फंस जाते हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य भी मुश्किल हो जाता है।
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नियमों की अवहेलना पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने साफ कहा है कि प्रतिबंध के दौरान चूड़धार की ओर जाने वाले किसी भी व्यक्ति को रोका जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेशों की उल्लंघना करने पर व्यक्ति खुद के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी खतरा खड़ा करता है।
लोगों से अपील—सुरक्षा को प्राथमिकता दें
SDM ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे कपाट खुलने और मौसम सामान्य होने तक यात्रा से पूरी तरह परहेज करें। उन्होंने कहा कि देवस्थल की यात्रा तभी शुभ है, जब सुरक्षित है।
