शाहपुर (कांगड़ा)। वीरभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश ने आज अपना एक बहादुर जवान खो दिया। कांगड़ा जिला के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले जवान चंद्र प्रकाश का आज पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। हर आंख नम थी और माहौल इतना गमगीन था कि वहां मौजूद लोग अपने आंसू रोक नहीं पाए। सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
तिरंगे में लिपटी घर पहुंची देह
जानकारी के अनुसार शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की रेहलू पंचायत के नागनी गांव निवासी जेसीओ चंद्र प्रकाश असम राइफल्स में तैनात थे। असम के सिलचर में देश की सेवा करते हुए तीन दिन पहले उनका अचानक निधन हो गया। शनिवार को सेना की ओर से उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर गांव लाया गया। जैसे ही सेना का वाहन गांव पहुंचा, भारत माता की जय और चंद्र प्रकाश अमर रहें के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
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सैन्य सम्मान से दी अंतिम विदाई
सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्र के लोग शामिल हुए। हर कोई अपने इस वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा। बता दें कि जवान की पत्नी का अभी मात्र छह माह पहले ही निधन हुआ था और जवान की मौत के बाद उनके तीन बच्चों के सिर से माता और पिता दोनों का ही साया उठ गया है।
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तीन बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया
जवान चंद्र प्रकाश के तीन बच्चे हैं। जिसमें दो बेटे और एक बेटी है। इन तीनों बच्चों ने अभी छह माह पहले ही मां को खोया था। मां के जाने का दर्द अभी भरा भी नहीं था कि अब उन्हें पिता की मौत ने तोड़ दिया है। तीनों बच्चों क आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बच्चांे को देख कर वहां मौजूद हर शख्स की आंख भी नम हो गई। हर कोई यह कहता दिखा कि भगवान ऐसा किसी के साथ ना करे।
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छह माह पहले हुआ था जवान की पत्नी का निधन
परिजनों के अनुसार चंद्र प्रकाश की पत्नी का निधन महज छह महीने पहले हुआ था। उस समय भी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा था। अब पिता के निधन से दो बेटे और एक बेटी पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। बच्चों के चेहरों पर छाई बेबसी और दर्द को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। अंतिम यात्रा में उनके बड़े भाई सूरज प्रकाश समेत परिजन और सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।
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विधायक केवल सिंह पठानिया ने भी शोक जताते हुए कहा कि चंद्र प्रकाश ने देश की सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित किया है। उनका जाना क्षेत्र और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में पूरा क्षेत्र शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है और बच्चों के भविष्य के लिए हर संभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। गांव के श्मशान घाट पर जब सैन्य सम्मान के साथ चंद्र प्रकाश को अंतिम विदाई दी गई, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। तिरंगे में लिपटे अपने वीर सपूत को विदा करते समय हर आंख नम थी और हर दिल में गर्व के साथ गहरा दर्द भी था।
