शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश हाईकोर्ट ने JBT शिक्षकों को भाषा शिक्षक (TGT हिंदी) के पदों पर दी गई पदोन्नति को लेकर सुक्खू सरकार को बड़ा झटका दिया है।

सुक्खू सरकार को HC ने दिया एक और झटका

हाईकोर्ट ने पदोन्नति पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अगर इस पदोन्नति प्रक्रिया को जारी रहने दिया गया तो यह कथित रूप से नियमों के विपरीत की गई कार्रवाई को वैधता प्रदान करने जैसा होगा।

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JBT प्रमोशन पर लगाई रोक

मामले की सुनवाई न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत में हुई, जहां याचिका पर विचार करते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए। अदालत ने मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए निर्देश दिए हैं।

सरकार से मांगा जवाब

कोर्ट ने सरकार से अगली सुनवाई से पहले विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की आगामी सुनवाई अगस्त माह में निर्धारित की गई है, जिसमें पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

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पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उठा विवाद

विवाद की जड़ शिक्षा विभाग द्वारा JBT शिक्षकों को भाषा शिक्षक (TGT हिंदी) के पदों पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) का गठन किया गया था।

 

विभागीय स्तर पर जारी निर्देशों में कहा गया था कि केवल उन्हीं JBT शिक्षकों के मामलों पर विचार किया जाए जो वर्ष 2009 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आवश्यक सेवाकाल पूरा करते हों। इसके बाद विभाग की ओर से 31 मार्च 2026 को पदोन्नति आदेश जारी कर दिए गए थे।

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नए नियमों को लेकर उठे सवाल

याचिका में यह तर्क रखा गया कि राज्य सरकार ने फरवरी 2025 में टीजीटी हिंदी पदों के लिए नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों को राजपत्र में प्रकाशित किए जाने के बाद वे प्रभावी हो गए थे।

 

याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि नए नियम लागू होने के साथ ही वर्ष 2009 के पुराने नियम स्वतः समाप्त हो गए थे। ऐसे में नए नियम लागू होने के बाद आयोजित की गई विभागीय पदोन्नति समिति को पदोन्नति संबंधी सभी निर्णय नए प्रावधानों के अनुसार लेने चाहिए थे।

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कोर्ट ने प्राथमिक दृष्टि से माना गंभीर मामला

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए पदोन्नति आदेशों पर रोक लगाने का निर्णय लिया। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि यदि नए नियम लागू होने के बावजूद पुराने नियमों के आधार पर पदोन्नति की गई है, तो इसकी वैधता पर सवाल उठ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले की पूरी सुनवाई से पहले पदोन्नति प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं होगा।

शिक्षा विभाग की प्रक्रिया पर बढ़ी निगाहें

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार और शिक्षा विभाग को अपने निर्णय का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा। मामले का परिणाम न केवल संबंधित शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में होने वाली विभागीय पदोन्नतियों के लिए भी महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।

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अगस्त में होगी अहम सुनवाई

अब इस मामले में अगली सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में होगी। तब तक संबंधित पदोन्नतियों पर रोक जारी रहेगी और राज्य सरकार को अदालत के समक्ष अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा। शिक्षा विभाग के हजारों कर्मचारी और पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षक इस मामले की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।

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