शिमला। हिमाचल प्रदेश में कथित नकली दवा निर्माण और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी से जुड़े मामले ने अब हाईकोर्ट का रुख कर लिया है। हिमाचल हाईकोर्ट ने नकली दवाइयों, कथित फर्जी पहचान पत्रों और करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी से जुड़े जनहित मामले में सुक्खू सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अन्य प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 7 अक्तूबर की तारीख तय की है।

27-28 टन कच्चे माल की कथित अवैध सप्लाई से उठे सवाल

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि पूरे मामले में करीब 27 से 28 टन फार्मास्युटिकल रॉ मैटीरियल की कथित अवैध सप्लाई हुई। इसके साथ धोखाधड़ी और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी के आरोप भी लगाए गए हैं। याचिका में कथित तौर पर अर्जित काले धन की जांच की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। इस पहलू के सामने आने के बाद मामला केवल नकली दवाओं तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कथित वित्तीय अनियमितताओं तक भी पहुंच गया है।

 

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275 किलो 'एक्सपोलटैब' का बिक्री रिकॉर्ड छिपाने का आरोप

मामले में संबंधित फार्मा कंपनी के निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने 275 किलोग्राम कथित नकली दवा 'एक्सपोलटैब' के बिक्री रिकॉर्ड को छिपाया। इसके अलावा बिना वैध लाइसेंस के बड़ी मात्रा में कथित नकली दवाओं के निर्माण का आरोप भी याचिका में लगाया गया है। याचिका के अनुसार यह गतिविधियां ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ सकती हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और जांच प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

 

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2023 में ड्रग लाइसेंस हो चुका था रद्द

मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि ड्रग विभाग ने संबंधित पक्षों का थोक दवा लाइसेंस जुलाई 2023 में रद्द कर दिया था। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ा। आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की गई, लेकिन राहत नहीं मिली।

नालागढ़ कोर्ट ने 2024 में भगोड़ा घोषित किया

अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद नालागढ़ की अदालत ने जनवरी 2024 में संबंधित आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया था। अब इस मामले में दायर जनहित याचिका ने कथित दवा निर्माण के साथ-साथ सप्लाई और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं को भी सामने ला दिया है।

 

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विजिलेंस ने भी जांच में संसाधनों की कमी बताई

मामले में राज्य के स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की भूमिका को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। 1 जुलाई 2026 को लिखे गए पत्र में विजिलेंस की ओर से कथित तौर पर इस तरह के जटिल मामले की जांच में व्यावहारिक दिक्कतों का उल्लेख किया गया था। ब्यूरो के अनुसार उसके पास पर्याप्त मैनपावर, संसाधन और राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी डोमेन का ज्ञान उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कथित जटिल वित्तीय हेराफेरी की जांच करना चुनौतीपूर्ण है।

हाईकोर्ट के नोटिस से बढ़ी हलचल

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। अब सरकार को अदालत के सामने मामले में हुई कार्रवाई और जांच की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अदालत के इस कदम से इस पूरे मामले की जांच, कथित वित्तीय अनियमितताओं और दवा निर्माण से जुड़े आरोपों पर आगे की कार्रवाई को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।

 

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अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को

फिलहाल हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। 7 अक्तूबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें कथित तौर पर नकली दवा निर्माण से लेकर फर्जी पहचान, भारी मात्रा में फार्मास्युटिकल कच्चे माल की सप्लाई और जीएसटी चोरी तक के कई गंभीर पहलू शामिल हैं।

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