शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज से जुड़े कार्य पर आए दिन कई सवाल उठते ही रहते हैं। ऐसे में एक बार फिर सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाले पैसों की पारदर्शिता को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
जिला शिमला से सामने आए एक पंचायत से कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अदालत ने साफ करते हुए कहा कि यदि शिकायतें सामने आई हैं तो उनकी जांच होनी भी जरूरी है। इसी के तरह पंचायती राज विभाग को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला शिमला जिले की ग्राम पंचायत जलाईल का है। पंचायत की पूर्व प्रधान अंजना रोहाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पंचायत के कुछ विकास कार्यों में सरकारी धन का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया। उनका दावा है कि खर्च से जुड़े दस्तावेजों में भी गड़बड़ियां की गईं, लेकिन शिकायत के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
विजिलेंस ने विभाग को भेजा था मामला
वहीं, सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने प्रारंभिक जांच के बाद इस मामले में सीधे भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की बजाय इसे प्रशासनिक जांच का विषय मानते हुए पंचायती राज विभाग को भेज दिया था। विभाग की ओर से कहा गया कि मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण आगे की कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालत ने कभी भी विभाग की जांच पर रोक नहीं लगाई थी। ऐसे में विभाग का कार्रवाई न करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने निर्देश दिए कि विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत की जांच की जाए और जो भी कानूनी कार्रवाई बनती हो, उसे बिना देरी के पूरा किया जाए।
इन निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवाल
याचिका में भीमराव अंबेडकर भवन और हनुमान मंदिर के पास बनाए गए खेल मैदान के निर्माण कार्यों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन परियोजनाओं में सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुईं और रिकॉर्ड में भी कथित तौर पर फेरबदल किया गया।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि विभागीय जांच के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं, तो नियमों के अनुसार मामला दोबारा विजिलेंस ब्यूरो को भेजा जा सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पंचायती राज विभाग जांच पूरी कर क्या कार्रवाई करता है।
