शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने के लिए सरकार तैनाती व्यवस्था को अधिक जरूरत आधारित बनाने की तैयारी में है। नई भर्तियों के बाद कर्मचारियों को उनकी पसंद के अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में तैनात करने के बजाय उन संस्थानों में भेजने पर जोर दिया जाएगा, जहां स्टाफ की वास्तविक आवश्यकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया में सिफारिश को आधार नहीं बनाया जाएगा।
मनपसंद पोस्टिंग के बजाय संस्थान की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के 200 से अधिक पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद करीब 250 और चिकित्सकों की भर्ती की जानी है। सरकार का लक्ष्य नई नियुक्तियों के जरिए उन स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन उपलब्ध कराना है, जहां लंबे समय से डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। इसके साथ ही नर्सिंग स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। डॉक्टरों के अलावा नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती में भी संबंधित स्वास्थ्य संस्थान की जरूरत को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
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नई व्यवस्था के तहत नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को अपनी पसंद की जगह पर पोस्टिंग हासिल करने के बजाय विभाग द्वारा निर्धारित स्थान पर सेवाएं देनी होंगी। विभाग संस्थानों में उपलब्ध और स्वीकृत पदों के साथ वहां मरीजों के दबाव तथा स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैनाती की प्रक्रिया तय करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल बड़े शहरों या सुविधाजनक स्थानों वाले अस्पतालों में ही स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या न बढ़े, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों तक भी नए मानव संसाधन का लाभ पहुंचे।
जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों पर विशेष फोकस
सरकार की प्राथमिकता जनजातीय क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। हिमाचल के कई दूरदराज क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता लगातार चुनौती बनी रहती है। ऐसे क्षेत्रों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए नई भर्तियों से उपलब्ध होने वाले कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी दूर के बड़े अस्पतालों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है।
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जरूरत के अनुसार तैनाती होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इन संस्थानों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होने पर मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही उपचार और चिकित्सकीय परामर्श मिल सकेगा। विभाग का मानना है कि इससे जिला अस्पतालों और राज्य स्तरीय बड़े अस्पतालों पर आने वाले मरीजों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से गंभीर मामलों को ही उच्च स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर करने की व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है।
स्वास्थ्य सचिव ने बताई विभाग की प्राथमिकता
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने कहा कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी है, वहां उपलब्ध मानव संसाधन को भेजने पर प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। विभाग की इस व्यवस्था का मुख्य फोकस यह है कि नई नियुक्तियों का लाभ केवल पद भरने तक सीमित न रहे, बल्कि उन इलाकों तक पहुंचे जहां स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक जरूरत है।
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सरकार के इस रुख से स्वास्थ्य विभाग में होने वाली नई नियुक्तियों और पोस्टिंग में संस्थानवार आवश्यकता को प्रमुख आधार बनाए जाने के संकेत हैं। डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी वाले क्षेत्रों की पहचान कर उसी के अनुरूप तैनाती करने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में नई भर्तियों से स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की उपलब्धता बढ़ने के साथ दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर करने की चुनौती भी विभाग के सामने रहेगी।
