शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू रविवार को एक बार फिर दिल्ली दौरे पर रवाना होंगे। महज पांच दिनों के भीतर मुख्यमंत्री का यह दूसरा दिल्ली दौरा है। इस बार उनका दौरा पूरी तरह प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विकास और आपदा राहत के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। मुख्यमंत्री 8 और 9 सितंबर को दिल्ली में भारत सरकार के तीन प्रमुख मंत्रालयों के साथ बैठक करेंगे और हिमाचल के लंबित मामलों को मजबूती से उठाएंगे।
आपदा प्रभावितों के लिए वन भूमि की करेंगे मांग
मुख्यमंत्री के एजेंडे में सबसे प्रमुख मुद्दा वन भूमि के डायवर्जन का है। प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास और उन्हें नए स्थानों पर बसाने के लिए भूमि की आवश्यकता है। ऐसे में सरकार चाहती है कि वन भूमि के उपयोग से संबंधित नियमों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रभावित परिवारों को राहत दी जा सके। वन भूमि के डायवर्जन का मामला सीधे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से जुड़ा है। मुख्यमंत्री दिल्ली में इस विषय को प्रमुखता से उठाकर केंद्र से आवश्यक स्वीकृति और सहयोग की मांग करेंगे।
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ब्यास में बढ़ता जलस्तर, कुल्लू-मनाली में ड्रेजिंग पर जोर
दूसरा बड़ा मुद्दा कुल्लू और मनाली क्षेत्र में ब्यास नदी की ड्रेजिंग का है। नदी के तल में बड़ी मात्रा में खनिज और मलबा जमा होने के कारण जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। सरकार का मानना है कि नदी की ड्रेजिंग कर जल प्रवाह को बेहतर किया जाना जरूरी है। हालांकि, वन संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के कारण इस काम में अड़चन आ रही है। मुख्यमंत्री केंद्र के सामने इस समस्या को रखते हुए ऐसी व्यवस्था की मांग करेंगे, जिससे पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए ब्यास नदी की आवश्यक ड्रेजिंग की जा सके।
जल जीवन मिशन की लंबित राशि भी बड़ा मुद्दा
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे में तीसरा अहम विषय जल जीवन मिशन की लंबित राशि है। हिमाचल सरकार केंद्र से इस योजना से जुड़ी रुकी हुई धनराशि जारी करने की मांग करेगी। इसके अलावा जल संसाधन मंत्रालय से जुड़े प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
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दिल्ली दौरे की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केंद्र सरकार के साथ बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा की थी। उस बैठक में संबंधित तीनों केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री को स्वयं दिल्ली आकर प्रदेश के मामलों को विस्तार से रखने का सुझाव और सहमति बनी थी। अब उसी क्रम में उनका दिल्ली दौरा तय हुआ है।
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पांच दिन में दूसरी बार दिल्ली
मुख्यमंत्री सुक्खू अभी हाल ही में दिल्ली से लौटे हैं। मानसून सत्र के अंतिम दिन वह दिल्ली दौरे पर गए थे। लेकिन पिछली यात्रा का एजेंडा मुख्य रूप से कांग्रेस संगठन और राजनीतिक मामलों से जुड़ा था। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस हाईकमान के नेताओं से मुलाकात कर मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में संभावित नियुक्तियों को लेकर चर्चा की थी।
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इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी उनकी बातचीत हुई थी। ऐसे में लगातार हो रहे दिल्ली दौरों के कारण प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ी हुई है। खासकर मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चाओं का दौर जारी है।
दिल्ली से सीधे ऊना पहुंच सकते हैं मुख्यमंत्री
दिल्ली दौरे के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू 10 सितंबर को ऊना में एंटी-चिट्टा वॉकथॉन में शामिल होंगे। पहले यह कार्यक्रम 7 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को देखते हुए इसकी तारीख बदलकर 10 सितंबर कर दी गई। संभावना है कि मुख्यमंत्री दिल्ली से सीधे ऊना पहुंचें। प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान को तेज करने के लिए इसके बाद मंडी में भी इसी तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
