शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों को आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और कदम उठाया है। प्रदेश के छह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को राजीव गांधी राजकीय मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ आधुनिक तकनीक, खेल और अन्य गतिविधियों से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
इन 6 स्कूलों का होगा कायाकल्प
दरअसल, सरकार का उद्देश्य खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जो आमतौर पर बड़े निजी स्कूलों में देखने को मिलती हैं। मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूलों में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी फोकस किया जाएगा।
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राजीव गांधी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल के लिए प्रदेश के छह सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है। इनमें करसोग का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (सीबीएसई), रामपुर बुशहर का राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (सीबीएसई), रोहड़ू का राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (एचपीबीओएसई), चौपाल का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (सीबीएसई), श्री रेणुका जी के नौहराधार का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (सीबीएसई) और ऊना विधानसभा क्षेत्र का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बहडाला शामिल हैं।
स्मार्ट क्लासरूम से लेकर खेल सुविधाएं
इन स्कूलों को सामान्य सरकारी विद्यालयों से अलग एक आधुनिक मॉडल के तौर पर विकसित करने की तैयारी है। इससे आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाओं के लिए दूर शहरों या निजी स्कूलों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है। इन मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए हाईटेक स्मार्ट कक्षाएं विकसित की जा रही हैं। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढ़ाई को अधिक इंटरैक्टिव और व्यावहारिक बनाने पर जोर रहेगा।
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इसके अलावा स्कूल परिसरों में आधुनिक खेल मैदान, इंडोर स्टेडियम और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन भी प्रदान किया जाएगा। यानी स्कूल में केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित शिक्षा के बजाय पढ़ाई, खेल, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों के सामने अक्सर आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं तक पहुंच की चुनौती रहती है। ऐसे में मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूलों की अवधारणा को इसी अंतर को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
24 हजार विद्यार्थियों के सरकारी स्कूलों में आने का दावा
सरकार की योजना है कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों को एक ऐसा वातावरण मिले, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास के अवसर भी मिल सकें। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अभिभावकों के भरोसे को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के अनुसार प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखकर काम कर रही है।
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उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों का असर दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि करीब 24 हजार विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों से निकलकर सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है। सरकार इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति अभिभावकों और विद्यार्थियों के बढ़ते भरोसे के संकेत के रूप में देख रही है।
सीबीएसई पाठ्यक्रम पर भी जोर
प्रदेश के चयनित कई स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम और आधुनिक सुविधाओं के संयोजन से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं तथा उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आधार मिल सकता है। राजीव गांधी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूलों की योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका फोकस केवल स्कूल की इमारत को आधुनिक बनाने पर नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर है।
