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August 11, 2026
100 रुपये में बाबा के दर्शन! मणिमहेश यात्रा में लॉटरी सिस्टम, श्रद्धालु खेलेंगे लकी ड्रॉ
हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं कठिन यात्रा
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में होने वाली मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार खास मौका है। अब महज 100 रुपये खर्च कर श्रद्धालु हेली टैक्सी से भगवान भोले के धाम तक पहुंचने का मौका पा सकते हैं।
रेड क्रॉस सोसायटी ने पहली बार श्रद्धालुओं के लिए लकी ड्रॉ शुरू करने का फैसला लिया है। इसके लिए पर्चियों की बिक्री 11 अगस्त से शुरू हो गई है। लकी ड्रॉ में चयनित श्रद्धालु को भरमौर से मणिमहेश और वापस भरमौर तक हेली टैक्सी से यात्रा करने का मौका मिलेगा।
इस लकी ड्रॉ की सबसे खास बात इसकी कीमत है। एक पर्ची सिर्फ 100 रुपये की होगी, जबकि भरमौर से मणिमहेश तक हेली टैक्सी से आने-जाने का पूरा किराया करीब 6,255 रुपये है। यानी लकी ड्रॉ में चयनित श्रद्धालु को करीब 6 हजार रुपये से ज्यादा का सफर महज 100 रुपये में करने का मौका मिलेगा।
रेड क्रॉस सोसायटी के मुताबिक पहले सप्ताह एक श्रद्धालु का लकी ड्रॉ निकाला जाएगा। अगर पर्चियां खरीदने वालों की संख्या बढ़ती है तो दूसरे सप्ताह से हर सप्ताह दो श्रद्धालुओं का चयन किया जाएगा।
लकी ड्रॉ में शामिल होने के लिए पर्चियां 11 अगस्त से SDM कार्यालय भरमौर और तहसील कार्यालय होली से मिलेंगी। जल्द ही ऑनलाइन पर्ची की सुविधा भी शुरू की जाएगी। इसके लिए QR कोड भरमौर प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया जाएगा।
भरमौर SDM अजय कुमार सिंह ने बताया कि मणिमहेश यात्रा करीब एक महीने तक चलेगी और इस दौरान हर सप्ताह लकी ड्रॉ निकाला जाएगा। चयनित विजेता को भरमौर से मणिमहेश तक हेली टैक्सी से यात्रा करने का अवसर मिलेगा।
इस साल मणिमहेश यात्रा 25 अगस्त से शुरू होकर 19 सितंबर तक चलेगी। यात्रा में हिमाचल के अलावा पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मणिमहेश झील समुद्र तल से करीब 13,385 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कठिन पहाड़ी रास्ते के बावजूद हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पवित्र डल झील में स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं।
मणिमहेश यात्रा के दौरान हेली टैक्सी सेवा भरमौर से गौरीकुंड तक उपलब्ध रहती है। भरमौर से गौरीकुंड की दूरी करीब 13 किलोमीटर है। गौरीकुंड पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को करीब डेढ़ किलोमीटर का रास्ता पैदल या घोड़े के जरिए तय करना पड़ता है।
यात्रा को लेकर प्रशासन ने भरमौर, हड़सर, धनछो, सुंदरासी और गौरीकुंड में पांच कैंप स्थापित किए हैं। इन कैंपों में मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह लंगर और ठहरने के लिए टेंट की व्यवस्था भी की जा रही है।
मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए श्रद्धालु मणिमहेश झील तक पहुंचते हैं। मान्यता है कि मणिमहेश कैलाश शिखर भगवान शिव का निवास है और इसी आस्था के चलते हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा पर पहुंचते हैं।
रेड क्रॉस सोसायटी और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से लकी ड्रॉ में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है। इस पहल से जहां रेड क्रॉस की गतिविधियों को सहयोग मिलेगा। वहीं किसी भाग्यशाली श्रद्धालु को बेहद कम कीमत में मणिमहेश के दर्शन के लिए हवाई सफर का मौका भी मिल सकेगा।