सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में बच्चों की सेहत को लेकर खास ध्यान दिया जाता है। छोटे बच्चों के सही विकास और पोषण के लिए उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ा जाता है, जहां नियमित रूप से उनका वजन, लंबाई और सेहत की जांच की जाती है। इसी कड़ी में सिरमौर जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की जनवरी महीने की ग्रोथ मॉनिटरिंग रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में एक तरफ प्रशासन की सक्रियता साफ दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ बच्चों के पोषण से जुड़ी कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं।

6 साल के बच्चों की हर महीने होती है जांच

सिरमौर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों में 6 साल तक के बच्चों का हर महीने वजन और लंबाई नापी जाती है, ताकि पता चल सके कि बच्चे सही तरीके से बढ़ रहे हैं या नहीं। जनवरी महीने की रिपोर्ट आई है, जिले में कुल 36,868 बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत हैं।

यह भी पढ़ें : हिमाचल को केंद्र का बड़ा तोहफा: फोरलेन के लिए दिए 294 करोड़, गडकरी ने पोस्ट कर लिखी ये बात

इनमें से 36,561 बच्चों का वजन और लंबाई नापी गई, यानी करीब 99 प्रतिशत बच्चों की मॉनिटरिंग की गई। यह अच्छी बात है कि लगभग सभी बच्चों की नियमित जांच हो रही है। 

कई बच्चे उम्र के हिसाब से छोटे रह गए  

लेकिन जब इन्हीं आंकड़ों को सेहत के नजरिये से देखा गया तो तस्वीर पूरी तरह सुकून देने वाली नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक 6,721 बच्चे उम्र के हिसाब से ठिगने पाए गए हैं। यानी लगभग हर पांच में से एक बच्चा अपनी उम्र के अनुसार लंबाई में पीछे है। यह लंबे समय से पोषण की कमी का संकेत माना जाता है। 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: कल से होंगे यह बड़े बदलाव, आपकी जेब पर पड़ेगा असर; रसोई गैस भी होगी महंगी

कुछ बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार

इसके अलावा 984 बच्चे तीव्र कुपोषण की श्रेणी में हैं। इनमें से 184 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं, जिन्हें खास देखभाल और इलाज की जरूरत है। वहीं 2,142 बच्चे कम वजन के पाए गए हैं।

कुछ बच्चों में बढ़ रहा मोटापा

चौंकाने वाली बात यह भी है कि अब समस्या सिर्फ कुपोषण तक सीमित नहीं रही। 1,088 बच्चे ऐसे भी हैं जो ज्यादा वजन या मोटापे से प्रभावित हैं। यानी जिले में अब दोहरी चुनौती है, कुछ बच्चे कमजोर हैं और कुछ का वजन जरूरत से ज्यादा है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल की जनता को बड़ा झटका : कल से राशन डिपुओं में कम मिलेगा आटे का कोटा

पच्छाद इलाके में सबसे ज्यादा दिक्कत

परियोजना स्तर पर पच्छाद इलाके के बच्चों में ठिगनापन सबसे ज्यादा पाया गया, जबकि संगड़ाह में गंभीर कुपोषण के मामले ज्यादा सामने आए। वहीं नाहन क्षेत्र ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जहां लगभग सभी बच्चों की समय पर मॉनिटरिंग हुई।

डबल खाना और सलाह से सुधार की कोशिश

जिला कार्यक्रम अधिकारी के मुताबिक, हर महीने बच्चों की लंबाई और वजन की जांच की जा रही है। जो बच्चे कम वजन के हैं, उन्हें आंगनबाड़ी में डबल डाइट दी जा रही है। गंभीर कुपोषित बच्चों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाती है ताकि उनका समय पर इलाज हो सके। माता-पिता को भी संतुलित आहार देने की सलाह दी जा रही है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : सड़क से सीधे नदी में जा समाई कार, 26 वर्षीय युवक ने तोड़ा दम- सदमे में परिवार

अब असली चुनौती सुधार लाने की

कुल मिलाकर, जनवरी की रिपोर्ट से यह साफ है कि निगरानी तो मजबूत है, लेकिन पोषण की लड़ाई अभी बाकी है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि जिन बच्चों में कमी पाई गई है, उनकी सेहत में कितना सुधार होता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें