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May 29, 2026

हिमाचल में नेता के बेटे पर भारी पड़े MLA के चाचा- BJP ने मारी बाजी, 191 वोटों से जीता चुनाव

चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी थी

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हमीरपुर। पंचायत चुनाव भले ही गांव की सरकार चुनने का माध्यम हों, लेकिन कई बार इनके नतीजे बड़े राजनीतिक संदेश छोड़ जाते हैं। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र की नवगठित छियोड़ी पंचायत में इस बार कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

नेता के बेटे पर भारी पड़े MLA के चाचा

यहां उपप्रधान पद का चुनाव दो राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया। नतीजा आया तो भाजपा खेमे में जश्न शुरू हो गया, जबकि कांग्रेस समर्थकों के लिए यह परिणाम किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा।

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विधायक के चाचा और कांग्रेस नेता के बीच थी लड़ाई

छियोड़ी पंचायत में उपप्रधान पद के लिए भाजपा विधायक आशीष शर्मा के चाचा प्रवीन कुमार शर्मा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक तथा प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप पठानिया के बेटे अभिषेक पठानिया आमने-सामने थे। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी थी, जिससे यह मुकाबला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था।

191 वोटों से दर्ज की बड़ी जीत

मतगणना पूरी होने के बाद परिणाम ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रवीन कुमार शर्मा को कुल 371 वोट प्राप्त हुए, जबकि अभिषेक पठानिया के पक्ष में 180 मत पड़े। इस तरह प्रवीन शर्मा ने 191 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर उपप्रधान पद पर कब्जा जमाया। चुनाव में कुल 551 वोट डाले गए थे। इनमें 11 वोट अमान्य घोषित किए गए, जबकि पांच मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।

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गृह पंचायत में प्रतिष्ठा की लड़ाई

इस चुनाव को खास इसलिए भी माना जा रहा था क्योंकि छियोड़ी पंचायत दोनों राजनीतिक परिवारों की गृह पंचायत मानी जाती है। ऐसे में स्थानीय लोग इस मुकाबले को सीधे तौर पर भाजपा विधायक आशीष शर्मा और कांग्रेस नेता कुलदीप पठानिया की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत स्तर पर मिली यह जीत और हार भविष्य की राजनीति के लिए भी कई संकेत छोड़ गई है।

भाजपा समर्थकों में जश्न

परिणाम घोषित होते ही भाजपा समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया और नारेबाजी की। वहीं कांग्रेस खेमे में मायूसी का माहौल देखने को मिला।

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अनुभव भी आया काम

प्रवीन कुमार शर्मा पंचायत राजनीति में नया चेहरा नहीं हैं। इससे पहले वह बोहणी पंचायत में दो बार उपप्रधान पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वहीं विधायक आशीष शर्मा की माता भी बोहणी पंचायत की प्रधान रह चुकी हैं। ऐसे में इस जीत को परिवार की लंबे समय से बनी राजनीतिक पकड़ और जनसमर्थन का परिणाम भी माना जा रहा है।

बदल रहे हैं पंचायतों के राजनीतिक समीकरण

छियोड़ी पंचायत का गठन हाल ही में हुआ है और यह पहले बोहणी पंचायत का हिस्सा थी। इस चुनाव परिणाम ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गए हैं। गांव की राजनीति में भी बड़े राजनीतिक दलों और प्रभावशाली परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगने लगी है।

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