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May 29, 2026
हिमाचल : पंचायत प्रधान बनने के लिए किया खेल- विरोधियों को RTI से डराया, फिर भी मिली करारी हार
चार उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया
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कांगड़ा। पंचायत चुनावों में अक्सर प्रत्याशी अपने विकास कार्यों और वादों को लेकर चर्चा में रहते हैं। मगर सराज की लेहथाच पंचायत में इस बार एक ऐसा चुनावी मुकाबला देखने को मिला- जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
यहां एक उम्मीदवार ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के कथित अवैध कब्जों की जानकारी RTI के माध्यम से जुटाकर चुनावी मैदान में हलचल मचा दी। मगर अंत में जनता का फैसला उनके पक्ष में नहीं गया।
पूर्व CM व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह विधानसभा क्षेत्र सराज की लेहथाच पंचायत में प्रधान पद के लिए छह उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इनमें से एक थे सेवानिवृत्त कर्मचारी कर्म सिंह, जो तहसील कार्यालय में क्लर्क के पद पर सेवाएं दे चुके हैं।
चुनाव से पहले उन्होंने अन्य उम्मीदवारों से जुड़ी कथित अवैध कब्जों की जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हासिल की और उसे सार्वजनिक किया। ग्रामीणों के बीच जैसे ही यह जानकारी चर्चा में आई, चुनावी माहौल पूरी तरह बदल गया।
बताया जा रहा है कि इसके बाद चार उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके चलते चुनावी मुकाबला सीधे फतेह सिंह और कर्म सिंह के बीच सिमट गया।हालांकि, चुनावी रण में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाले कर्म सिंह को इसका सीधा फायदा नहीं मिल सका। मतदान के बाद आए परिणामों में जनता ने फतेह सिंह पर भरोसा जताया।
प्रधान पद के लिए हुए मतदान में कुल 792 वोट पड़े। मतगणना के दौरान फतेह सिंह को 419 वोट मिले, जबकि कर्म सिंह को 356 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा 4 वोट नोटा के पक्ष में पड़े।
इस तरह फतेह सिंह ने 63 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर लेहथाच पंचायत के नए प्रधान बनने का गौरव हासिल किया। बताया जा रहा है कि RTI के जरिए जुटाई गई जानकारी में फतेह सिंह के खिलाफ किसी प्रकार के अवैध कब्जे का मामला सामने नहीं आया था।
वहीं, पंचायत में उपप्रधान पद के लिए चुनाव की जरूरत नहीं पड़ी। इस पद के लिए पांच लोगों ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन बाद में चार उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद भूपेंद्र ठाकुर को सर्वसम्मति से निर्विरोध उपप्रधान चुन लिया गया।
लेहथाच पंचायत का यह परिणाम अब पूरे सराज क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि चुनाव में मुद्दे और आरोप अपनी जगह होते हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता ही करता है। यही कारण रहा कि सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले उम्मीदवार को जीत नहीं मिल सकी।